# Hindumystery > know hinduism ## Posts - [काली चौदस क्या है ? जानें शुभ मुहूर्त और पूजा विधि](https://hindumystery.com/kali-chaudas-kya-hai-shubh-muhurt-puja-vidhi/): हर वर्ष दिवाली से एक दिन पहले की तिथि को काली चौदस के रूप में जाना जाता है लेकिन क्या आप जानते हैं, काली चौदस क्या है ? आज इस लेख में हम आपको काली चौदस से जुड़ी हर बात बताएँगे साथ ही हम आपको बताएँगे किन चीजों का पालन करते हुए आप इस दिन माँ काली की कृपा प्राप्त कर सकते हैं। काली चौदस क्या है काली चौदस हिंदू धर्म का एक महत्वपूर्ण त्योहार है जो दिवाली से एक दिन पहले मनाया जाता है। यह त्योहार देवी काली की पूजा के लिए समर्पित है, जिन्हें हिंदू धर्म में शक्ति और ... Read more - [गोवत्स द्वादशी पूजा विधि](https://hindumystery.com/govatsa-dwadashi-puja-vidhi/): गोवत्स द्वादशी पूजा विधि: गोवत्स द्वादशी हिंदू धर्म का एक त्योहार है जो कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की द्वादशी तिथि को मनाया जाता है। यह गाय और बछड़े को समर्पित है, और इसे विशेष रूप से उनकी पूजा करने के लिए एक शुभ दिन माना जाता है। इसे भी पढ़ें : गोवत्स द्वादशी पूजा विधि | govatsa dwadashi puja vidhi महिलाओं द्वारा, गोवत्स द्वादशी पूजा विधि का पालन करते हुए यदि सच्चे मन और श्रद्धा भाव के साथ व्रत किया जाता है तो उनकी संतान पर आने वाले सभी संकट टल जाते हैं। इस व्रत के बारे में मान्यता यह ... Read more - [गोवत्स द्वादशी कथा: बछ बारस की कहानी गौ माता की](https://hindumystery.com/bach-baras-vrat-katha-govatsa-dwadashi-katha/): बछ बारस की कहानी गौ माता की: बछ बारस एक हिंदू व्रत है जो हर साल भाद्रपद महीने के कृष्ण पक्ष की द्वादशी तिथि को मनाया जाता है। यह व्रत संतान प्राप्ति और संतान की लंबी आयु के लिए किया जाता है। भारतवर्ष के कुछ स्थानों पर इसे बछ बारस का पर्व कहा जाता है वहीं भारत में दूसरे स्थानों पर इसे गोवत्स द्वादशी ( govatsa dwadashi ) के नाम से जाना जाता है। आज इस लेख में हम आपको बछ बारस की कथा के बारे में बताएँगे कि किस प्रकार साहूकार गोहत्या के पाप से भी बच गया और उसे ... Read more - [अहोई अष्टमी आरती: Ahoi Ashtami aarti in hindi](https://hindumystery.com/ahoi-ashtami-aarti-in-hindi/): अहोई अष्टमी आरती के कई फायदे हैं। अहोई अष्टमी व्रत में अहोई माता की पूजा करने के बाद, संतान की लंबी आयु और मंगलमय जीवन के लिए आरती करी जाती है। इस आरती को पढ़ने से अहोई माता प्रसन्न होती हैं। अहोई माता को संतान की रक्षा करने वाली देवी माना जाता है। इस आरती को पढ़ने से अहोई माता संतान की रक्षा करती हैं और उन्हें लंबी आयु प्रदान करती हैं। इसे बह पढ़ें : अहोई अष्टमी आरती | ahoi ashtami vrat aarti अहोई माता की आरती: जय अहोई माता, मैया जय अहोई माता। तुमको निसदिन ध्यावत, हरि विष्णु विधाता। ... Read more - [अहोई अष्टमी व्रत के नियम: इन नियमों का पालन करे बिना यह व्रत निष्फल हो जायेगा](https://hindumystery.com/ahoi-ashtami-vrat-ke-niyam/): अहोई अष्टमी व्रत के नियम, इस व्रत का एक महत्वपुर्ण भाग हैं। यदि व्रत करते समय इन नियमों की अवहेलना हो जाती है तो आपके द्वारा किया जा रहा अहोई अष्टमी व्रत आपके लिए पूर्ण फलदायी नहीं होगा। यदि आप चाहती हैं की अहोई अष्टमी का व्रत पूर्ण फलदायी हो और आपकी संतान इस व्रत फल से पूर्ण लाभान्वित हो तो इसके लिए अहोई अष्टमी व्रत के नियमों का पालन करें। अहोई अष्टमी का व्रत कार्तिक माह में कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को को रखा जाता है। व्रत इस दिन माँ पार्वती की अहोई माता के रूप में पूजा की ... Read more - [करवा चौथ आरती, आपके व्रत को फलदायी बना देगी](https://hindumystery.com/karwa-chauth-arti/): करवा व्रत की आरती भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करने में सहायक होती है। करवा चौथ व्रत पूजा में शिव पार्वती और गणेशजी की आरती के साथ करवा चौथ आरती जरूर करनी चाहिए यह आपके व्रत को सफल एवं फलदायी बनाती है। इसे भी पढ़ें : करवा चौथ आरती | karwa chauth aarti ओम जय करवा मैया, माता जय करवा मैया। जो व्रत करे तुम्हारा, पार करो नइया।। ओम जय करवा मैया। सब जग की हो माता, तुम हो रुद्राणी। यश तुम्हारा गावत, जग के सब प्राणी।। ओम जय करवा मैया। कार्तिक कृष्ण चतुर्थी, जो नारी व्रत करती। दीर्घायु पति होवे , ... Read more - [शरद पूर्णिमा के दिन खीर का महत्व जानकर चौंक जायेंगे | जानिए पूजा विधि](https://hindumystery.com/sharad-purnima-ke-din-kheer-ka-mehetv/): शरद पूर्णिमा का त्योहार आश्विन मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है। शरद पूर्णिमा के दिन खीर का महत्व धार्मिक, सांस्कृतिक और औषधीय तीनों तरह से होता है। शरद पूर्णिमा के दिन, लोग चंद्रमा की पूजा करने के साथ ही देवी लक्ष्मी और भगवान विष्णु की पूजा करते हैं। इस दिन, लोग खीर बनाकर चांद की रोशनी में रखते हैं और अगले दिन उसे प्रसाद के रूप में खाते हैं। खीर को देवी लक्ष्मी का प्रसाद माना जाता है और इस दिन इसे खाने से मां लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं। यह त्योहार शरद ऋतु ( सर्दियों का मौसम ) के आगमन ... Read more - [जल आचमन क्या होता है, कैसे करें | पूजा से पहले क्यों जरूरी है जल आचमन](https://hindumystery.com/jal-achman/): हिन्दू धर्म के सभी धार्मिक अनुष्ठानों में किसी भी पूजा-पाठ की प्रक्रिया से पूर्व पंडित या पुजारी द्वारा जल आचमन करवाया जाता है। किन्तु बहुत से लोग नहीं जानते कि यह किसलिए करवाया जाता है, यह करने का उद्देश्य क्या है। आज इस लेख में हम आपको जल आचमन ( jal aachman ) से जुड़ी हर बात बताएँगे। जल आचमन क्या होता है | jal achman kya hota hai जल आचमन, पूजा-अर्चना, यज्ञ, हवन आदि धार्मिक अनुष्ठानों के आरंभ में किया जाने वाला एक महत्वपूर्ण अनुष्ठान है। इस प्रक्रिया में जल पिया जाता है और शरीर को शुद्ध किया जाता है। ... Read more - [Papankusha Ekadashi: पापांकुशा एकादशी का व्रत खोलेगा मोक्ष का रास्ता| जानिए विधि, कथा, महत्व](https://hindumystery.com/papankusha-ekadashi/): Papankusha Ekadashi 2025 Date: इस वर्ष पापांकुशा एकादशी की व्रत तिथि 3 अक्टूबर है। पापांकुशा एकादशी हिंदू धर्म में एक महत्वपूर्ण पर्व है। यह आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को मनाया जाता है, और यह तिथि इस वर्ष 3 अक्टूबर है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा की जाती है और माना जाता है कि इस दिन व्रत रखने से सभी पापों से मुक्ति मिलती है। जातक इस लोक में सभी सुखों को भोग कर अंत में मोक्ष प्राप्त करता है। यदि पापांकुशा एकादशी का व्रत विधिपूर्वक किया जाए तो इससे श्रीहरि विष्णु प्रसन्न होते हैं और अपने भक्तों ... Read more - [दशहरा के उपाय | 5 ऐसे उपाय जो आपको खुशहाल बना सकते हैं](https://hindumystery.com/dussehra-ke-upay/): दशहरा के दिन दशहरा के उपाय करके आप अपने जीवन में चल रही कठिनाईओं से छुटकारा पा सकते हैं। Dussehra Upay आपके जीवन में सुख, समृद्धि और सफलता लाने में मदद करते हैं। यह हिंदू धर्म का एक महत्वपूर्ण त्योहार है, जिसे भगवान राम की रावण पर विजय के रूप में मनाया जाता है। यह त्योहार बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। भारत के बहुत से हिस्सों में इसी त्यौहार को विजयदशमी के रूप में मनाया जाता है। विजयदशमी की कथा के अनुसार इस दिन माँ दुर्गा ने महिषासुर का वध किया था। यह त्योहार भी बुराई पर अच्छाई ... Read more - [माँ सिद्धिदात्री की आरती| Maa Siddhidatri Aarti](https://hindumystery.com/maa-siddhidatri-aarti/): माँ सिद्धिदात्री की पूजा करने के बाद माँ सिद्धिदात्री की आरती करनी चाहिए। यह आरती भक्तों को सभी प्रकार के कष्टों से मुक्ति दिलाती है और भक्तों को सुख-समृद्धि प्रदान करती है। इसे भी पढ़ें : माँ सिद्धिदात्री की आरती जय सिद्धिदात्री तू सिद्धि की दाता। तू भक्तों की रक्षक तू दासों की माता।। तेरा नाम लेते ही मिलती है सिद्धि। तेरे नाम से मन की होती है शुद्धि।। कठिन काम सिद्ध कराती हो तुम। हाथ सेवक के सर धरती हो तुम।। तेरी पूजा में न कोई विधि है। तू जगदंबे दाती तू सर्वसिद्धि है।। रविवार को तेरा सुमरिन करे जो। ... Read more - [आखिरी नवरात्र|करो माँ सिद्धिदात्री की पूजा विधि अनुसार, और नवरात्र पूजा को सफल बनाओ](https://hindumystery.com/maa-siddhidatri-worship/): नवरात्री के नौवें दिन माँ सिद्धिदात्री की पूजा विधि के अनुसार करी जाती है और भक्त माँ का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। भक्त इस दिन माँ का व्रत रखते हैं और सिद्धिदात्री माता की कथा कहते / सुनते हैं। माँ सिद्धिदात्री को सभी प्रकार की सिद्धियों की दाता माना जाता है। वे भक्तों को सभी प्रकार के कष्टों से मुक्ति दिलाती हैं और उन्हें सुख-समृद्धि प्रदान करती हैं। माँ सिद्धिदात्री का स्वरुप | Maa Siddhidatri ka swarup माँ सिद्धिदात्री चार भुजाओं वाली हैं। उनकी दाहिनी तरफ के ऊपर वाले हाथ में सुदर्शन चक्र है, दाहिनी तरफ के नीचे वाले हाथ में ... Read more - [नवरात्र में कन्या पूजन कब करना चाहिए|कन्या पूजन का समय और सही विधि](https://hindumystery.com/kanya-pujan-kab-karna-chahiye/): माँ के भक्तों द्वारा नवरात्रि के 9 दिनों में मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा की जाती है। किन्तु इन 9 दिनों में कन्या पूजन कब करना चाहिए। कौनसा दिन कन्या पूजन के लिए सबसे श्रेष्ट है और कन्या पूजन विधि क्या है इन सभी प्रश्नों को लेकर माँ के भक्त सदैव असमंजस की स्थिति में रहते हैं। कन्या पूजन कब करना चाहिए | Kanya pujan kab karna chahiye नवरात्र में कन्या पूजन अनुष्ठान में, नौ कन्याओं को आमंत्रित किया जाता है और उन्हें मां दुर्गा के नौ रूपों का प्रतीक माना जाता है। कन्याओं को आदर और सम्मान के ... Read more - [माँ महागौरी की आरती|Maa Mahagauri Aarti](https://hindumystery.com/maa-mahagauri-ki-aarti/): नवरात्र के आठवें दिन माँ महागौरी का व्रत और पूजन किया जाता है और पूजा के बाद माँ महागौरी की आरती करी जाती है । धार्मिक मान्यता है कि पूरे विधि-विधान से माँ महागौरी की पूजा करने के बाद पूजा के अंत में माँ महागौरी की आरती करनी चाहिए। इससे माँ प्रसन्न होती है और अपने भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी करती हैं। मां महागौरी को सुख, समृद्धि और सौंदर्य की देवी माना जाता है। माँ महागौरी की आरती जय महागौरी माता, मैया जय महागौरी। तुमको निशदिन ध्यावत, हर विष्णु विधाता॥ ब्रह्माणी रुद्राणी, तुम कामला रानी। आद्यां शक्ति, महा शक्ति, भवानी ... Read more - [आज 8वें नवरात्रे पर करो माँ महागौरी पूजा और भर लो अपना जीवन खुशियों से](https://hindumystery.com/maa-mahagauri-puja/): आज है आठवाँ नवरात्र दिन माँ महागौरी को समर्पित होता है। इस दिन व्रत रखा जाता है और माँ महागौरी ( Maa Mahagauri ) पूजा की जाती है। माँ महागौरी को श्वेत वृष पर सवार तथा त्रिशूल और डमरूधारी के रूप में दर्शाया जाता है। इनका वर्ण अत्यंत गौर है, इसलिए इन्हें महागौरी कहा जाता है। माँ महागौरी को सुख, समृद्धि और सौंदर्य की देवी माना जाता है। इनकी पूजा से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। माँ महागौरी पूजा | Maa Mahagauri puja यदि मन के छल कपट से दूर होकर पुरे विधि-विधान से माँ की पूजा की जाती है तो ... Read more - [माँ कालरात्रि की आरती करने से मौत का डर होगा दूर](https://hindumystery.com/maa-kalratri-ki-aarti/): नवरात्री का सातवां दिन माँ कालरात्रि को समर्पित होता है। पुरे विधि-विधान से माँ की पूजा करने के बाद माँ कालरात्रि की आरती करने से मन से अकाल मृत्यु का डर दूर हो जाता है और साथ ही भक्तों को मनवांछित फल प्राप्त होता है। इसे भी पढ़ें : माँ कालरात्रि की आरती | Maa Kalratri ki aarti कालरात्रि जय-जय-महाकाली। काल के मुह से बचाने वाली॥ दुष्ट संहारिणी नाम तुम्हारा। महाचंडी तेरा अवतारा॥ पृथ्वी और आकाश पे सारा। महाकाली है तेरा पसारा॥ खडग खप्पर रखने वाली। दुष्टों का लहू चखने वाली॥ कलकत्ता स्थान तुम्हारा। सब जगह देखूं तेरा नजारा॥ सभी देवता ... Read more - [आज है 7 वां नवरात्र : माँ कालरात्रि की पूजा करने से अकाल मृत्यु का भय होगा दूर](https://hindumystery.com/maa-kalratri-ki-puja-vidhi/): आज है 7 वां नवरात्र, माँ कालरात्रि नवरात्रि के सातवें दिन की देवी हैं। इस नवरात्र के सातवें दिन कीजिये माँ कालरात्रि की पूजा विधि का पालन। आपको अकाल मृत्यु का भय नहीं सताएगा। Maa Kalratri स्वरूप देखने में भयानक है, लेकिन ये सदैव शुभ फल ही देने वाली हैं। इनका नाम “कालरात्रि” होने का कारण यह है कि ये देवी काल का काल हैं यानी माँ का स्वरूप काल को भी जीतने वाला है। इसे भी पढ़ें:- माँ कालरात्रि की कथा माँ कालरात्रि की पूजा विधि | Maa Kalratri ki puja vidhi माँ कालरात्रि की पूजा सातवें नवरात्र पर की ... Read more - [कात्यायनी माता की आरती| maa katyayani aarti in hindi lyrics](https://hindumystery.com/katyayni-mata-ki-aarti/): कात्यायनी माता की आरती छठे नवरात्रे पर माँ कात्यायनी की पूजा करने के बाद कात्यायनी माता की आरती करें फिर प्रसाद बांटे। माँ कात्यायनी आपकी हर मनोकामना पूर्ण करेंगी। इसे भी पढ़ें : जय जय अंबे जय कात्यायनी। जय जगमाता जग की महारानी ।। बैजनाथ स्थान तुम्हारा। वहां वरदाती नाम पुकारा ।। कई नाम हैं कई धाम हैं। यह स्थान भी तो सुखधाम है।। हर मंदिर में जोत तुम्हारी। कहीं योगेश्वरी महिमा न्यारी।। हर जगह उत्सव होते रहते। हर मंदिर में भक्त हैं कहते।। कात्यायनी रक्षक काया की। ग्रंथि काटे मोह माया की ।। झूठे मोह से छुड़ानेवाली। अपना नाम जपानेवाली।। ... Read more - [माँ कात्यायनी पूजा विधि फॉर मैरिज](https://hindumystery.com/maa-katyayni-puja-vidhi-for-marriage/): नवरात्री का छठा दिन माँ कात्यायनी को समर्पित है। इस बार 3 अप्रैल 2025 को छठा नवरात्रा है। यदि आप पुरी विधि से पालन करेंगे माँ कात्यायनी पूजा विधि फॉर मैरिज का तो इससे से विवाह में आने वाली बाधाएं होंगी दूर और आपको मिलेगा अपना मनचाहा जीवनसाथी। देवी कात्यायनी ने महर्षि कात्यायन की भक्ति से प्रसन्न होकर, उनके द्वारा माँगा गया वर पूरा करने के लिए महर्षि कात्यायन के घर उनकी पुत्री के रूप में जन्म लिया। छठे नवरात्रे में कात्यायनी माँ की पूजा के दौरान कुछ उपायों के द्वारा शीघ्र ही विवाह के योग बनते हैं। माँ कात्यायनी पूजा ... Read more - [तीसरे नवरात्रे में माँ चंद्रघंटा की आरती से होंगे आपको 4 लाभ](https://hindumystery.com/maa-chandraghanta-ki-aarti/): नवरात्री का तीसरा दिन माँ चंद्रघंटा ( maa chandrghanta ) को समर्पित होता है। इस दिन पुरे विधि-विधान से माँ की पूजा करने के बाद माँ चंद्रघंटा की आरती से कई लाभ प्राप्त होते हैं। माँ चंद्रघंटा के दाएं हाथ में तलवार और बाएं हाथ में कमल है। उनका वाहन सिंह है। देवी माँ का नाम “चंद्रघंटा” इसलिए पड़ा क्योंकि इनके मस्तक पर एक चंद्रमा विद्द्यमान है। माँ चंद्रघंटा की आरती | Maa Chandraghanta ki aarti जय माँ चंद्रघंटा सुख धाम, पूर्ण कीजो मेरे काम चंद्र समान तू शीतल दाती, चंद्र तेज किरणों में समाती क्रोध को शांत बनाने वाली, मीठे ... Read more - [24 और 25 सितम्बर दोनों दिन रहेगा तीसरा नवरात्र](https://hindumystery.com/third-navratri-vrat-katha/): इस बार तीसरा नवरात्र 24 और 25 सितम्बर दोनों दिन रहेगा। दोनों दिन माँ चंद्रघंटा का पूजन किया जायेगा। ऐसा इसीलिए हो रहा है क्यूंकि नवरात्रि का तीसरा दिन तृतीया तिथि और चतुर्थी तिथि के संयोग में आ रहा है। तिथि और नक्षत्रों का यह विशेष संयोग अत्यंत दुर्लभ है। इस संयोग को अत्यंत शुभ फलदायी भी बताया गया है। तीसरा नवरात्र व्रत कथा|माँ चंद्रघंटा की कथा Maa chandraghanta ki katha तीसरे नवरात्र में माँ चंद्रघंटा देवी की पूजा की जाती है। देवी माँ की पूजा करने के बाद तीसरा नवरात्र व्रत कथा पढ़ी और सुनी जाती है। माँ चंद्रघंटा की ... Read more - [आज है दूसरा नवरात्र : जानिए माँ ब्रह्मचारिणी कौन हैं| कैसे करेंगे माँ ब्रह्मचारिणी की पूजा](https://hindumystery.com/maa-brahmacharini-kaun-hain/): नवरात्रि का दूसरे दिन इस दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा की जाती है। लेकिन क्या आप जानते हैं माँ ब्रह्मचारिणी कौन हैं । सभी 9 नवरात्रों में हर दिन देवी माँ के अलग-अलग रूपों की पूजा की जाती है। इसी क्रमानुसार दूसरे नवरात्र में माँ ब्रह्मचारिणी (Maa Brahmacharini) की पूजा की जाती है। माँ ब्रह्मचारिणी कौन हैं | Maa Brahmacharini kaun hain माँ ब्रह्मचारिणी देवी माँ के 9 रूपों में से एक रूप है। ब्रह्मचारिणी माँ को ज्ञान, तपस्या और वैराग्य की देवी माना जाता है। कठोर साधना और ब्रह्म में लीन रहने के कारण इन्हें ब्रह्मचारिणी कहा गया है। माँ ... Read more - [पहला नवरात्र 22 सितम्बर 2025: माँ शैलपुत्री व्रत कथा, पूजा विधि](https://hindumystery.com/first-navratri-maa-shailputri-puja-vidhi/): पहला नवरात्र माँ शैलपुत्री | pehla navratri Maa Shailputri नवरात्रि के प्रथम दिन मां शैलपुत्री की पूजा होती है। पहला नवरात्र माँ शैलपुत्री को समर्पित है। मां शैलपुत्री को हिमालय की पुत्री माना जाता है। इनका जन्म शैल अर्थात पत्थर से हुआ था, जिसके कारण इन्हें शैलपुत्री के नाम से जाना जाता है। मां शैलपुत्री श्वेत वस्त्र धारण कर वृषभ की सवारी करती हैं। देवी के बाएं हाथ में कमल सुशोभित है। यदि आप पूरे 9 नवरात्रों के व्रत रखना चाहते है तो पहले नवरात्र को पूजा करते समय सबसे पहले देवी माँ के समक्ष व्रत का संकल्प लें। इसके लिए ... Read more - [मृत्यु होने पर क्या दामाद ससुर का अंतिम संस्कार कर सकता है](https://hindumystery.com/kya-daamaad-sasur-ka-antim-sanskaar-kar-sakata-hai/): हिन्दू धर्म में, मृत्यु को एक स्वाभाविक घटना माना जाता है। मृत्यु के बाद आत्मा शरीर से अलग हो जाती है और अपने अगले जन्म के लिए तैयार हो जाती है। मृत्यु के बाद, मृतक के शरीर का अंतिम संस्कार किया जाता है। यह एक महत्वपूर्ण अनुष्ठान होता है। इसको करने के लिए बहुत से दिशानिर्देश बताये गए हैं जिनमें बताया गया है, क्या दामाद ससुर का अंतिम संस्कार कर सकता है या नहीं, मृत्यु के बाद क्या दामाद श्राद्ध कर सकते हैं इसी तरह की और भी कई बातें हैं जिनके बारे में हम आपको इस लेख में बताएँगे। क्या ... Read more - [श्राद्ध कब नहीं करना चाहिए](https://hindumystery.com/shraadh-kab-nhi-karna-chahiye/): हिंदू धर्म में, श्राद्ध (Shradh) एक महत्वपूर्ण धार्मिक अनुष्ठान है जो पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए किया जाता है। यह अनुष्ठान पितृ पक्ष के दौरान किया जाता है, जो भाद्रपद मास की पूर्णिमा से अश्विन मास की अमावस्या तक चलता है। श्राद्ध के माध्यम से लोग अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करते हैं। लेकिन कुछ ऐसे दिन भी होते हैं जिनमे श्राद्ध करना वर्जित होता है। क्या आप जानते हैं श्राद्ध कब नहीं करना चाहिए। तो चलिए इस लेख के माध्यम से करते हैं आपकी जिज्ञासा को शांत। श्राद्ध कब नहीं करना चाहिए | shradh ... Read more - [गाय के शरीर में कितने देवी-देवता का वास है](https://hindumystery.com/gaay-ke-sharir-me-kitne-devi-devta-ka-vaas-hai/): हिंदू धर्म में, गाय को पवित्र माना जाता है और उसे माता का दर्जा दिया जाता है। गाय को सभी देवी-देवताओं का निवास स्थान माना जाता है। अक्सर भक्तों के मन में यह सवाल उठता है कि गाय के शरीर में कितने देवी-देवता का वास है। चलिए आपकी जिज्ञासा शांत करते हैं और आपको बताते हैं कि गाय के शरीर में कितने देवी देवता का वास है। गाय के शरीर में कितने देवी-देवता का वास है | gaay ke sharir me kitne devi devta ka vas hai शास्त्रों के अनुसार, गाय के शरीर में 33 कोटि देवी-देवताओं का वास है अर्थात ... Read more - [दशहरा 2025 | आपको बताएँगे आखिर क्यों मनाया जाता है दशहरे का त्यौहार और क्या है इसके पीछे की कहानी](https://hindumystery.com/dussehra-festival-full-story/): दशहरा का त्यौहार भारत में हर साल पुरे हर्षोउल्लास के साथ मनाया जाने वाला एक बड़ा त्यौहार है। दशहरा 2023 के त्यौहार को भी हम इसी प्रकार पूरी ख़ुशी के साथ मनाएंगे क्यूंकि यह त्यौहार को बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है... - [Mahaveer Swami | यहाँ आप जानेंगे महावीर स्वामी के जीवन से जुड़ी हर बात](https://hindumystery.com/mahavir-swami/): महावीर स्वामी जैन समाज के 24वें तीर्थंकर हैं। इस वर्ष महावीर जयंती ( Mahaveer Jayanti 2024 ) 21अप्रैल 2024 को मनाई जाएगी। इस अवसर पर सम्पूर्ण भारत में जैन मंदिरों को सजाया जाता है और जैन धर्म के अनुयायियों द्वारा शोभायात्राएं भी निकाली जाती हैं। भगवान् महावीर स्वामी ने इसी तिथि की इस धरती पर जन्म लिया था। जिस युग में इस धरती पर हिंसा, पशु बलि जैसे कृत्य बहुत बढ़ गए उसी युग में भगवान् महावीर स्वामी इस धरती पर आये। उन्होंने हिंसा के खिलाफ लोगों को जागरूक किया और समाज को अहिंसा का पाठ पढ़ाया। जैन ग्रंथो के अनुसार ... Read more - [शिवलिंग कैसे बना |शिवलिंग का आकार ऐसा क्यों है [ जानिये इसका विज्ञान ]](https://hindumystery.com/science-behind-shivling-shape/): आज हम आपको शिवलिंग से जुड़े ऐसे फैक्ट बताएंगे जिनको जानने के बाद आपको अपने कई प्रश्नों का उत्तर मिल जायेगा जैसे - शिवलिंग कैसे बना, शिवलिंग कहाँ से आया। इसके साथ ही आप शिवलिंग से जुडी ऐसी बातें जानेंगे जो आप आज से पहले नहीं जानते थे |  इस लेख में हम आपको हिन्दू ग्रंथों के आधार पर शिवलिंग से जुड़ी साइंस बताएँगे |  - [परशुराम का इतिहास | parshuram ka itihas](https://hindumystery.com/lord-parashurama/): परशुराम जी को भगवान् विष्णु का छठा अवतार माना जाता है। उनका जन्म वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को हुआ था। इस दिन को अक्षय तृतीया के नाम से जाना जाता है और हर साल अक्षय तृतीया के दिन परशुराम जयंती मनाई जाती है। हिन्दू मान्यताओं के अनुसार परशुराम सात चिरंजीवी देवों में से एक हैं और वे आज भी इस धरती पर मौजूद हैं। आज इस लेख में हम आपको परशुराम के जीवन से जुडी सभी बातें बताएँगे। - [Bhang, Ganja [ 24 Amazing Medical Industrial Facts in Hindi ]](https://hindumystery.com/bhang-ganja-medical-industrial-facts-hindi/): भांग या फिर गांजा आप जो भी कहिये एक ऐसा पौधा जिसके गुणों के बारे में इस समाज में बहुत ही कम जानकारी है। लेकिन हिन्दू धर्म में, उनके पूर्वज भांग के गुणों अच्छी तरह जानते थे इसीलिए भांग को शास्त्रों में विजया नाम दिया गया है अर्थात्त गुणों के आधार पर यदि तुलना करी जाय तो भांग इस धरती पर पायी जाने वाली सभी वनस्पतियो से विजयी होती है, सभी वनस्पतियों से श्रेष्ट होती है। इस लेख में हम आपको बताएँगे कि धार्मिक महत्व के अलावा भी भांग के औषधीय गुण होते हैं। भांग क्या है | bhang kya hai भांग इस ... Read more - [शिव को भांग क्यों चढ़ाया जाता है | जानिए इसका विज्ञान](https://hindumystery.com/shiv-ko-bhang-kyu-chadhate-hai/): भांग जिससे समाज में नशा फैल रहा है, वह भांग शिव का प्रसाद कैसे हो सकती है। इस लेख में आपको मिलेगा अपनी हर जिज्ञासा का हल। - [शिवलिंग पर दूध और जल क्यों चढ़ाते हैं जानिये इसका विज्ञान](https://hindumystery.com/shivling-par-dudh-jal-kyu-chadhate-hain/): क्या आप जानते हैं शिवलिंग पर दूध और जल क्यों चढ़ाते हैं। इस लेख में हम आपको शिवलिंग पर दूध और जल चढाने के वैज्ञानिक कारणों के बारे में बताएँगे। हिन्दू धर्म में कहा गया है की भगवान् शिव आदि से अंत तक हैं और सावन का पूरा महीना उन्हीं शिव को अर्पित है। भोलेनाथ की कृपा पाने के लिए भक्त सावन के महीने में उपवास करते हैं और शिवलिंग का जलाभिषेक करते हैं। आमतौर पर भक्त लोग शिवलिंग का अभिषेक जल और दूध से करते हैं लेकिन क्या आप जानते हैं शिवलिंग पर दूध चढ़ाने का वैज्ञानिक कारण क्या है ... Read more - [सावन शिवरात्रि 2025 तारीख | सावन में भगवान शिव की पूजा कैसे करें](https://hindumystery.com/sawan-shivratri/): Photo by Hari mangayil on pixabay सावन शिवरात्रि का अपना एक विशेष महत्व है। क्यूंकि सावन का महीना भगवान् शिव अति को प्रिय है। इस दिन भगवान् शंकर की उपासना से सुख सम्मृद्धि की प्राप्ति होती है। भगवान् शिव के भक्त कांवड़ यात्रा करके गंगा जल लाते हैं और इस दिन भगवान् शिव का गंगाजल से अभिषेक किया जाता है। इस लेख को पढ़कर आप जानेंगे कि सावन में भगवान शिव की पूजा कैसे करें। साथ ही आप जानेंगे कि सावन शिवरात्रि और सावन सोमवार की व्रत विधि क्या है। सावन शिवरात्रि 2025 तारीख और समय | sawan shivratri 2025 tarikh ... 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Read more - [क्या हिन्दू धर्म में बलि प्रथा है | Pashu bali in Hinduism](https://hindumystery.com/kya-hindu-dharm-me-bali-pratha-hai/): क्या हिन्दू धर्म में बलि प्रथा है यह प्रश्न बहुत जटिल और विविध है। क्यूंकि एक तरफ हमारे अनेक धर्म ग्रन्थ अहिंसा और दया को सर्वोच्च धर्म बताते हैं। वहीं दूसरी तरफ समाज में पुराने समय से चली आ रही कुछ परंपराओं में यज्ञ या देवी-पूजा के दौरान पशुबलि का रिवाज देखने को मिलता है। आज हम अपने पाठकों को प्रमाणों के साथ इस प्रश्न का उत्तर देने का प्रयास करेंगे वर्तमान समय में अधिकांश हिन्दू समुदाय प्रतीकात्मक बलि या बिना पशुबलि के ही अपने आराध्य की पूजा करना स्वीकार करते हैं। यहाँ इस बात को जानना आवश्यक हो जाता है ... 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Read more - [माँ शैलपुत्री आरती | maa shailputri aarti](https://hindumystery.com/maa-shailputri-aarti/): माँ शैलपुत्री आरती | maa shailputri aarti शैलपुत्री मां बैल पर सवार। करें देवता जय जयकार। शिव शंकर की प्रिय भवानी। तेरी महिमा किसी ने ना जानी। पार्वती तू उमा कहलावे। जो तुझे सिमरे सो सुख पावे। ऋद्धि-सिद्धि परवान करे तू। दया करे धनवान करे तू। सोमवार को शिव संग प्यारी। आरती तेरी जिसने उतारी। उसकी सगरी आस पुजा दो। सगरे दुख तकलीफ मिला दो। घी का सुंदर दीप जला के। गोला गरी का भोग लगा के। श्रद्धा भाव से मंत्र गाएं। प्रेम सहित फिर शीश झुकाएं। जय गिरिराज किशोरी अंबे। शिव मुख चंद्र चकोरी अंबे। मनोकामना पूर्ण कर दो। भक्त ... Read more - [अपने गोत्र से कुलदेवी कैसे पता करें](https://hindumystery.com/how-to-find-out-kuldevi-from-your-gotra/): “गोत्र से कुलदेवी कैसे पता करें” का आसान तरीका जानिए। परिवार की वंशावली, कुलगुरु और परंपराओं के माध्यम से अपनी कुलदेवी और उनके महत्व को समझें। अपने गोत्र से कुलदेवी कैसे पता करें | Apne Gotra se Kuldevi kaise pta kre केवल गोत्र से आप अपनी कुलदेवी का पता नहीं लगा सकते। क्यूंकि एक ही गोत्र वाले लोग अलग-अलग क्षेत्रों में रहते हैं और उनकी कुलदेवी अलग हो सकती हैं। कुलदेवी का संबंध वंश, स्थान और इतिहास से है। इसलिए सही जानकारी के लिए वंशावली, कुलगुरु, परिवार के बुजुर्गों और पारिवारिक परंपरा का सहारा लेना चाहिए। कुलदेवी जानने के पारंपरिक तरीके ... Read more - [श्राद्ध में कौए और कुत्ते को क्यों खिलाएं](https://hindumystery.com/why-should-we-feed-crows-and-dogs-during-shradh/): श्राद्ध (पितरों का तर्पण) एक ऐसा कर्मकांड है जिसमें पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए भोजन और जल का अर्पण किया जाता है। इसी दौरान बहुत से लोगों के मन में यह प्रश्न होता है कि श्राद्ध में कौए और कुत्ते को क्यों खिलाएं। इनको खाना खिलाने का हमारे पितरों की संतुष्टि से क्या सम्बन्ध है। श्राद्ध में कौए और कुत्ते को क्यों खिलाएं | Shradh me Crow or Dog ko kyun khilayen गरुड़ पुराण और अन्य धार्मिक ग्रंथों में बताया गया है कि श्राद्ध के दौरान कौए और कुत्ते को भोजन देना चाहिए। ऐसा विश्वास है कि पितर विभिन्न ... Read more - [आर्थिक तंगी में श्राद्ध कैसे करें](https://hindumystery.com/arthik-tangi-me-shradh-kaise-kren/): पितृपक्ष के दौरान अपने पूर्वजों के प्रति श्रद्धा प्रकट करने और उनकी आत्मा की शांति के लिए श्राद्ध कर्म का विधान है। अक्सर लोग यह सोचते हैं कि श्राद्ध कर्म एक खर्चीला अनुष्ठान है, जिसमें ब्राह्मण भोज और दान-दक्षिणा आवश्यक है। यह सोचकर आर्थिक रूप से तंगी झेल रहे लोग चाह कर भी श्राद्ध कर्म का अनुष्ठान नहीं कर पाते। आर्थिक तंगी में श्राद्ध कैसे करें | Arthik tangi me Shradh kaise kre शास्त्रों में इस बात का स्पष्ट उल्लेख है कि यदि कोई व्यक्ति आर्थिक रूप से सक्षम नहीं है, तो भी वह अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार श्राद्ध ... Read more - [पितरों की तृप्ति के लिए श्राद्ध का भोजन बनाने के नियम](https://hindumystery.com/shraadh-ka-bhojan-banane-ke-niyam/): श्राद्ध पक्ष में पितरों के प्रति श्रद्धा और सम्मान प्रकट करने के लिए उनके निमित्त भोजन बनाकर ब्राह्मणों को खिलाया जाता है। श्राद्ध का भोजन बनाने के नियम जानना पितरों की तृप्ति के लिए बहुत जरूरी है। यह भोजन अत्यंत सात्विकता और नियमों का पालन करते हुए बनाया जाना चाहिए ताकि पितर तृप्त होकर अपने वंशजों को आशीर्वाद प्रदान करें। श्राद्ध का भोजन बनाने की प्रक्रिया में शुद्धि, पवित्रता और श्रद्धा का विशेष महत्व है। श्राद्ध का भोजन बनाने के नियम | Shradh ka Bhojan banane ke Niyam श्राद्ध का भोजन बनाने के नियम के अंतर्गत शारीरिक और मानसिक शुद्धता का ... Read more - [मंदिर में प्रसाद कैसे चढ़ाएं](https://hindumystery.com/mandir-me-prasaad-kaise-chadhayen/): मंदिर में bhagwaan ko prasad चढ़ाना भक्ति और कृतज्ञता व्यक्त करने का एक महत्वपूर्ण अंग है। लेकिन मंदिर में प्रसाद कैसे चढ़ाएं यह बहुत कम लोग जानते हैं। मंदिर में प्रसाद चढ़ाना एक पवित्र प्रक्रिया है जिसके कुछ पारंपरिक नियम और शिष्टाचार हैं। इनका पालन करने से पूजा का पूर्ण फल प्राप्त होता है और मन को शांति मिलती है। यहाँ मंदिर में प्रसाद चढ़ाने की एक विस्तृत विधि दी गई है। मंदिर में प्रसाद कैसे चढ़ाएं | Mandir me prasad kaise Chadhayen मंदिर में प्रसाद चढ़ाने के लिए सोने, चांदी, पीतल, मिट्टी या केले के पत्ते का उपयोग करें। प्रसाद ... Read more - [क्या गर्भवती महिला तुलसी की पूजा कर सकती है](https://hindumystery.com/kya-garbhwati-mahila-tulsi-puja-kar-sakti-hai/): गर्भावस्था के दौरान पूजा-पाठ करना शुभ और मानसिक शांति देने वाला होता है, लेकिन क्या गर्भवती महिला तुलसी की पूजा कर सकती है। गर्भावस्था के दौरान तुलसी की पूजा करना धर्म के अनुसार सही है या नहीं इसके साथ ही एक गर्भवती महिला के स्वास्थ्य इसका क्या असर होता है हम इस बारे में भी चर्चा करेंगे। क्या गर्भवती महिला तुलसी की पूजा कर सकती है | Kya Garbhwati mahila Tulsi puja kar sakti hai तुलसी पूजा करने से मन को शांति मिलती है और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। गर्भवती महिला के लिए यह मानसिक शांति बहुत महत्वपूर्ण है। ... Read more - [पितरों को जल देने की सरल विधि](https://hindumystery.com/pitron-ko-jal-dene-ki-vidhi/): पितरों को जल (तर्पण) देना हिंदू परंपरा में पितरों का सम्मान और आशीर्वाद प्राप्त करने का तरीका है। यह सामान्यत: प्रतिदिन सुबह या पितृपक्ष के समय किया जाता है। यहाँ पितरों को जल देने की सरल विधि बताई गयी है: पितरों को जल देने की सरल विधि | Pitron ko Jal dene ki saral vidhi तर्पण विधि: पितृपक्ष में पितरों को जल देने के लिए एक लौटे जल में तिल और कुशा डालकर घर के आँगन, छत या फिर नदी, तालाब के किनारे दक्षिण दिशा की ओर मुख करके धीरे-धीरे जल दक्षिण दिशा की ओर अर्पित करें। पितरों को जल देते ... Read more - [गणेश चतुर्थी कब है 2025|हिन्दू त्योहारों में दो तारीखों की उलझन का राज़](https://hindumystery.com/ganesh-chaturthi-kab-hai/): गणेश चतुर्थी कब है 2025: गणेश चतुर्थी हिंदू धर्म का एक प्रमुख त्योहार है, जिसे भगवान गणेश के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। इसे भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को मनाया जाता है (आमतौर पर अगस्त–सितंबर के महीने में)। इस दिन भगवान गणेश को बुद्धि, समृद्धि और सौभाग्य के देवता के रूप में पूजा जाता है। गणेश चतुर्थी कब है 2025 | Ganesh chaturthi kab hai 2025 गणेश चतुर्थी तिथि की शुरुआत 26 अगस्त को दोपहर 1 बजकर 53 मिनट पर होगी और इस तिथि तिथि की समाप्ति 27 अगस्त की दोपहर 3 बजकर 43 मिनट पर ... Read more - [मासिक धर्म के बारे में कृष्ण क्या कहते हैं](https://hindumystery.com/masik-dharm-ke-bare-me-krishna-kya-kehete-hain/): मासिक धर्म के बारे में कृष्ण क्या कहते हैं। इस लेख में हम आपको बताएँगे मासिक धर्म के बारे में श्री कृष्ण ने क्या कहा है और हिन्दू धर्मग्रंथों में इसके लिए क्या दृष्टिकोण मिलता है। मासिक धर्म के बारे में कृष्ण क्या कहते हैं | Masik dharm ke bare me Krishna kya kehte hain मासिक धर्म के बारे में कृष्ण क्या कहते हैं। यह एक ऐसा प्रश्न है जिसके बारे में सीधे तौर पर भगवत गीता या अन्य प्रमुख ग्रंथों में भगवान कृष्ण के मुख से कोई स्पष्ट और विस्तृत उपदेश नहीं मिलता है। भगवद् गीता मुख्य रूप से आत्मा, ... Read more - [क्या महिलाएं तुलसी की माला पहन सकती हैं](https://hindumystery.com/kya-mahilaen-tulsi-mala-pehen-sakti-hain/): हिन्दू शास्त्रों में तुलसी को देवी तुलसी के रूप में पूजनीय माना गया है। तुलसी माला धारण करना बहुत शुभ होता है। लेकिन क्या महिलाएं तुलसी की माला पहन सकती हैं। यह प्रश्न हिन्दू भक्तों के मन में सदैव उठता है। क्या महिलाएं तुलसी की माला पहन सकती हैं | Kya mahila tulsi ki mala pehen sakti hai हिंदू धर्म में, तुलसी की माला को बहुत पवित्र और पूजनीय माना जाता है, और इसे धारण करने का अधिकार सभी को है, चाहे वह पुरुष हो या महिला। इसीलिए महिलाएँ भी निश्चित रूप से तुलसी की माला पहन सकती हैं। तुलसी की ... Read more - [राधा अष्टमी और जन्माष्टमी में क्या अंतर है](https://hindumystery.com/radha-ashtami-or-janmashtami-me-kya-antar-hai/): राधा अष्टमी और जन्माष्टमी, दोनों ही हिन्दू धर्म के प्रमुख त्योहार हैं। राधा अष्टमी और जन्माष्टमी में क्या अंतर है। आज हम आपको बताएँगे। राधा अष्टमी और जन्माष्टमी में क्या अंतर है | Radha ashtami or Janmashtmi me kya antar hai जन्माष्टमी का पर्व भगवान श्री कृष्ण के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। वहीं दूसरी तरफ राधा अष्टमी का पर्व श्री कृष्ण की शक्ति और भक्ति की प्रतीक देवी राधा रानी के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। जन्माष्टमी का पर्व अधर्म पर धर्म की, बुराई पर अच्छाई की विजय और भगवान के पृथ्वी पर अवतरण का प्रतीक ... Read more - [चरक संहिता के अनुसार भोजन के नियम](https://hindumystery.com/charak-sanhita-ke-anusar-bhojan-ke-niyam/): चरक संहिता के अनुसार भोजन के नियम केवल पेट भरने के लिए नहीं, बल्कि शरीर, मन और आत्मा के संतुलन के लिए बनाए गए हैं। इसमें भोजन को औषधि की तरह माना गया है। चरक संहिता के अनुसार भोजन के नियम | charak samhita ke anusar bhojan ke niyam चरक संहिता के नियम अनुसार व्यक्ति को सही समय पर ताज़ा और स्वच्छ भोजन करना चाहिए। भोजन मौसम के अनुसार और विविध रसों से युक्त होना चाहिए। भोजन से पहले भूखा होना और भोजन के दौरान मन का शांत होना बहुत जरूरी है। भोजन के बाद थोड़े विश्राम के लिए कहा गया ... Read more - [कैलाश मानसरोवर यात्रा के नियम](https://hindumystery.com/kailash-mansarovar-yatra-ke-niyam/): जीवन में एक बार कैलाश मानसरोवर की यात्रा करने से जीवन धन्य हो जाता है यदि आप भी कैलाश मानसरोवर जाने का सोच रहे है तो कैलाश मानसरोवर यात्रा के नियम जानना आपके लिए बहुत जरूरी है। यदि आप इनकी जानकारी नहीं रखेंगे तो हो सकता है आपको एक बड़ी परेशानी का सामना करना पड़ जाए। इस लेख में हम आपको विस्तार से बताएँगे कि कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए क्या नियम हैं। कैलाश मानसरोवर यात्रा के नियम | kailash mansarovar yatra ke niyam कैलाश मानसरोवर की यात्रा करना हर हिन्दू की मनोकामना होती है। इसी को देखते हुए और कैलाश ... Read more - [क्या विधवा स्त्री सत्यनारायण पूजा कर सकती है](https://hindumystery.com/kya-vidhwa-stree-satyanarayan-puja-kar-sakti-hai/): क्या विधवा स्त्री सत्यनारायण पूजा कर सकती है। यदि शास्त्रों के दृष्टिकोण से इस विषय को देखा जाए तो हिन्दू धर्म में विधवा स्त्री के लिए पूजा-पाठ का अधिकार स्पष्ट रूप से प्रतिबंधित नहीं है, बल्कि सामाजिक रूढ़ियों के कारण ही विधवा स्त्री को पूजा-पाठ से वंचित किया गया है। क्या विधवा स्त्री सत्यनारायण पूजा कर सकती है | kya vidhwa stree satyanarayan puja kar sakti hai सत्यनारायण की पूजा एक ऐसी पूजा है जो सभी के लिए खुली है और इसमें सभी भक्त भाग ले सकते हैं। ऐसा कोई धार्मिक नियम नहीं है जो विधवा महिलाओं को सत्यनारायण पूजा करने ... 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Read more - [एकलव्य का अंगूठा व आज की धनुर्विद्या](https://hindumystery.com/eklavya-or-dronacharya/): गुरू द्रोणाचार्य शस्त्र विद्या में निपुण हस्तिनापुर के राजगुरू होने के साथ ही एक अजेय योद्धा भी थे । द्रोणाचार्य का यह अस्त्र कौशल सुनकर सहस्रों राजा और राजकुमार धनुर्वेद की शिक्षा लेने के लिये वहाँ एकत्रित हो गये। लेकिन क्योंकि वो एक राजगुरू थे अतः उन्होंने कौरव व पांडवों को छोड़कर अन्य सभी की शिक्षा देने से मना कर दिया । एकलव्य का अंगूठा व आज की धनुर्विद्या | eklavya ka angutha kyon kata gaya तदनन्‍तर निषादराज हिरण्‍यधनुका का पुत्र एकलव्‍य द्रोण के पास आया। परंतु एक राजगुरु सिर्फ राजा के पुत्रों को ही शिक्षा दे सकता है अतः उन्होंने ... Read more - [भारत में जातिवाद का इतिहास | क्या आप मीरा और उनके गुरु रविदास की जाती जानते हैं](https://hindumystery.com/bharat-me-jativad/): भारत में जातिवाद Bharat me jativad का इतिहास ऐसा रहा है कि प्राचीन समय से भारत मे कभी छुआछुत रहा ही नहीं, और ना ही कभी जातियाँ भेदभाव का कारण होती थी।चलिए हजारो साल पुराना इतिहास पढ़ते हैं।  भारत में जातिवाद का इतिहास | Bharat me jativaad ka itihas सम्राट शांतनु ने विवाह किया एक मछवारे की पुत्री सत्यवती से।उनका बेटा ही राजा बने इसलिए भीष्म ने विवाह न करके,आजीवन संतानहीन रहने की भीष्म प्रतिज्ञा की। सत्यवती के बेटे बाद में क्षत्रिय बन गए, जिनके लिए भीष्म आजीवन अविवाहित रहे, क्या उनका शोषण होता होगा? महाभारत लिखने वाले वेद व्यास भी ... Read more - [शाकाहारी vs मांसाहारी | शाकाहार जीवन को सफल बनाने का एक उपाय](https://hindumystery.com/shakahari-vs-mansahari/): शाकाहारी vs मांसाहारी: अपनी मृत्यु….. अपनों की मृत्यु डरावनी लगती है बाकियों की तो मौत का उत्सव मनाता है मनुष्य…। शाकाहारी vs मांसाहारी | shakahari vs mansahari मौत के स्वाद का चटखारे लेता मनुष्य…. थोड़ा कड़वा लिखा है पर मन का लिखा है……। मौत से प्यार नहीं , मौत तो हमारा स्वाद है। बकरे का,  पाए का,  तीतर का,  मुर्गे का,  हलाल का,  बिना हलाल का,  ताजा बच्चे का,  भुना हुआ, छोटी मछली,  बड़ी मछली,  हल्की आंच पर सिका हुआ।  न जाने कितने बल्कि अनगिनत स्वाद हैं मौत के। क्योंकि मौत किसी और की, और स्वाद हमारा…. स्वाद से कारोबार बन ... Read more - [ललितादित्य किंग ऑफ़ कश्मीर | अलेक्जेंडर ऑफ इंडिया](https://hindumystery.com/lalitaditya-king-of-kashmir/): अलेक्जेंडर ऑफ इंडिया जी हाँ सही पढ़ा आपने भारत के इतिहास में ऐसे अनेकों राजा हुए हैं जो कि बहुत ही महान शासक हुए हैं। जिनमे ललितादित्य किंग ऑफ़ कश्मीर भी एक ऐसे ही एक शासक हैं। ललितादित्य किंग ऑफ़ कश्मीर | अलेक्जेंडर ऑफ इंडिया Lalitaditya alexander of india ललितादित्य मुक्तापीड (अलेक्जेंडर ऑफ इंडिया) इनका परचम बहुत दूर – दूर तक लहराया करता था । कश्मीर में इनका राज्यकाल 724 से 761 ई तक। लेकिन ये एक बहुत बड़ी विडंबना है कि हमलोगों में से बहुत कम लोगों ने ये नाम पहले कभी सुना होगा । क्योंकि भारतीय इतिहास की बहुत सी ... Read more - [शबरी के जूठे बेर खाए भजन | बड़ा ही मीठा लागे रे माई तेरे हाथों का बेर](https://hindumystery.com/shabri-ke-juthe-ber-khaye-bhajan/): शबरी के जूठे बेर खाए भजन – राम-शबरी कथा भक्ति, श्रद्धा और ईश्वर की करुणा का अत्यंत मार्मिक प्रसंग है, जो हमें यह सिखाती है कि भगवान केवल भक्ति को स्वीकार करते हैं, न कि जाति, रूप या सामाजिक स्थिति को देखते हैं। शबरी के जूठे बेर खाए भजन | shabri ke juthe ber khaye bhajan बड़ा ही मीठा लागे रे माई तेरे हाथों का बेर बड़ा ही मीठा लागे रे माई तेरे हाथों का बेर ।मात हाथ दूध भात कंचन कटोरी खात प्रेम से कौशल्या मात भोजन बनाती हैं,चंवर डुलाय रही फूली न समाय रही मात मझली तो निज हाथ ... Read more - [एकादशी पर चावल न खाने का वैज्ञानिक कारण क्या है](https://hindumystery.com/ekadashi-par-chawal-na-khane-ka-vaigyanik-karan/): भगवान विष्णु को समर्पित एकादशी व्रत हिंदू धर्म में एक अत्यंत पवित्र और महत्वपूर्ण व्रत है। क्या आप जानते हैं एकादशी पर चावल न खाने का वैज्ञानिक कारण क्या है। एकादशी व्रत के वैज्ञानिक महत्व क चर्चा तो होती ही रहती है लेकिन आज हम एकादशी पर चावल न खाने के वैज्ञानिक कारणों पर चर्चा करेंगे। एकादशी व्रत हर महीने शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को रखा जाता है और इस तिथि पर रखे जाने वाले एकादशी व्रत के दिन चावल न खाने का वैज्ञानिक कारण क्या है। इस विषय पर हम आपको विस्तार से बताएँगे। एकादशी पर ... Read more - [सफेद जादू क्या है](https://hindumystery.com/safed-jadu-kya-hai/): क्या आप जानते हैं सफेद जादू क्या है। जादू एक ऐसा शब्द है जो ऐसे कार्यों या घटनाओं का वर्णन करता है जिन्हें सामान्य प्राकृतिक नियमों से समझा नहीं जा सकता और इसी जादू का एक रूप सफ़ेद जादू भी होता है। सफेद जादू क्या है| Safed jadu kya hai सफेद जादू उस जादुई प्रथा को कहा जाता है जिसका उपयोग दूसरों की मदद करने, सकारात्मक बदलाव लाने, उपचार करने या सुरक्षा प्रदान करने जैसे निःस्वार्थ और लाभकारी उद्देश्यों के लिए किया जाता है। सफेद जादू  पारंपरिक रूप से निस्वार्थ और समाज की भलाई के लिए किया जाता है सफेद जादू ... Read more - [नारद स्मृति में हिन्दू विवाह के नियम](https://hindumystery.com/narada-smriti-me-hindu-vivah-ke-niyam/): नारद स्मृति प्राचीन हिन्दू धर्मशास्त्रों में एक महत्वपूर्ण ग्रंथ है, जो नारद ऋषि द्वारा रचित माना जाता है। नारद स्मृति में हिन्दू विवाह के नियम भी बताये गए हैं। विवाह नियमों के साथ ही इसमें इसमें धर्म, आचार, न्याय, और सामाजिक नियमों का एक विस्तृत वर्णन मिलता है। नारद स्मृति में हिन्दू विवाह के नियम | narad smriti me hindu vivah ke niyam नारद स्मृति हिन्दू विवाह से संबंधित कई नियमों और सिद्धांतों का उल्लेख करती है। यह ग्रंथ विवाह को सामाजिक व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण आधार मानता है। नारद स्मृति में वर्णित हिन्दू विवाह के प्रमुख नियम इस प्रकार हैं: ... Read more - [स्वाधिष्ठान चक्र कैसे जागृत करें](https://hindumystery.com/swadhisthana-chakra-kaise-jagrit-kre/): स्वाधिष्ठान चक्र (Svadhisthana Chakra), जिसे त्रिक चक्र भी कहा जाता है, सात मुख्य चक्रों में से दूसरा चक्र है। स्वाधिष्ठान चक्र कैसे जागृत करें। यह जानना आपके लिए बहुत फायदेमंद हो सकता है। क्यूंकि यह चक्र आपको आपका जीवन लक्ष्य खोजने में मदद करेगा। इस चक्र का रंग नारंगी होता है। यह चक्र हमारी ऊर्जा प्रणाली का एक महत्वपूर्ण केंद्र है जो हमारी भावनाओं, रचनात्मकता, यौन ऊर्जा, और आनंद से जुड़ा हुआ है। स्वाधिष्ठान चक्र कैसे जागृत करें | swadhishthan chakr kaise jagrit kre स्वाधिष्ठान चक्र जागृत करने के लिए सबसे पहले समतल स्थान पर आसन बिछा कर बैठें। अपनी रीढ़ ... Read more - [अन्वाधान क्या है|अन्वाधान विधी क्या है](https://hindumystery.com/anvadhan/): अन्वाधान मुख्य रूप से यज्ञ की अग्नि को प्रज्वलित रखने का वैदिक अनुष्ठान है। इसके साथ ही इस दिन व्रत रखने और अन्वाधान विधी anvadhan vidhi का पालन करते हुए पूजा करने का भी विधान है। विशेष रूप से इस पर्व का पालन वैष्णव समुदाय द्वारा अधिक किया जाता है, जो भगवान विष्णु को सर्वोच्च मानते हैं। इस दिन भक्त उपवास रखते हैं । यहाँ अन्वाधान व्रत और पूजा विधि के मुख्य पहलू दिए गए हैं। अन्वाधान विधी | anvadhan vidhi इस के दिन भक्त श्रद्धापूर्वक व्रत रखते हैं। इस व्रत का मुख्य उद्देश्य शारीरिक और मानसिक शुद्धि के साथ-साथ अनुष्ठान ... Read more - [परशुराम द्वादशी 2025](https://hindumystery.com/parshuram-dwadashi/): परशुराम द्वादशी 2025: इस वर्ष परशुराम द्वादशी की तिथि 8 मई 2025 है। हिंदू धर्म में परशुराम द्वादशी का विशेष महत्व है। यह पर्व वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि को मनाया जाता है। इस दिन भगवान विष्णु के छठे अवतार भगवान परशुराम की पूजा-अर्चना की जाती है। इस दिन को धर्म और न्याय की स्थापना के प्रतीक के रूप में देखा जाता है। परशुराम द्वादशी 2025 | parshuram dwadashi धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि को ही भगवान परशुराम को भगवान शिव से उनका फरसा (परशु) प्राप्त हुआ था। इसी परशु से ... Read more - [त्रिशूर पूरम महोत्सव](https://hindumystery.com/thrissur-pooram-mahotsav/): भारत “उत्सवों की भूमि” है क्योंकि यहाँ हर धर्म, क्षेत्र, मौसम और संस्कृति के अनुसार उत्सव मनाए जाते हैं। इसी तरह एक उत्सव है जिसे त्रिशूर पूरम महोत्सव कहते हैं। आज हम आपको इस उत्सव का महत्व, इतिहास और मनाने का तरीका बताएँगे। भारत में मनाये जाने वाले प्रत्येक उत्सव का अपना विशेष महत्व, इतिहास और मनाने का तरीका है। ये उत्सव देश की समृद्ध संस्कृति, परंपराओं और धार्मिक सद्भाव के प्रतीक हैं। त्रिशूर पूरम महोत्सव | thrissur pooram mahotsav त्रिशूर पूरम महोत्सव केरल का एक बहुत ही भव्य और प्रसिद्ध वार्षिक मंदिर उत्सव है। यह उत्सव केरल के त्रिशूर शहर ... Read more - [आयुर्वेद के अनुसार क्या खाना चाहिए](https://hindumystery.com/ayurved-ke-anusar-kya-khana-chahiye/): आयुर्वेद के अनुसार क्या खाना चाहिए इसकी जानकारी होना इसीलिए आवश्यक है क्यूंकि भोजन शरीर, मन और आत्मा को पोषण देता है। भोजन केवल पेट भरने के लिए नहीं, बल्कि स्वास्थ्य बनाए रखने और बीमारियों को रोकने का एक महत्वपूर्ण साधन है। आयुर्वेद में भोजन को औषधि के समान माना गया है, और इसका कार्य शरीर में त्रिदोष (वात, पित्त, कफ) का संतुलन बनाए रखना भी होता है। आयुर्वेद के अनुसार क्या खाना चाहिए | ayurved ke anusar kya khana chahiye आयुर्वेद के अनुसार व्यक्ति को वही भोजन खाना चाहिए जो उसके शरीर की प्रकृति, उसकी आयु, मौसम, उसके रहने के ... Read more - [आयुर्वेद के अनुसार सुबह क्या खाना चाहिए](https://hindumystery.com/ayurved-ke-anusar-subah-kya-khana-chahiye/): आयुर्वेद के अनुसार सुबह क्या खाना चाहिए क्यूंकि भोजन केवल पेट भरने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह शरीर, मन और आत्मा को संतुलन में रखने का एक साधन है। इसीलिए आज हम इस विषय पर चर्चा करेंगे। आयुर्वेद में भोजन को ‘औषधि’ माना गया है, और इसे शरीर के दोषों वात, पित्त और कफ के अनुसार चुनने और ग्रहण करने की सलाह दी जाती है। आयुर्वेद के अनुसार सुबह क्या खाना चाहिए | ayurved ke anusar subah kya khana chahiye आयुर्वेद सुबह के नाश्ते में सुपाच्य भोजन को सबसे उत्तम बताता है। आयुर्वेद के अनुसार सुबह के समय भीगे हुए ... Read more - [मासिक कार्तिगाई का व्रत](https://hindumystery.com/masik-karthigai-ka-vrat/): मासिक कार्तिगाई का व्रत भगवान मुरुगन (कार्तिकेय) को समर्पित एक महत्वपूर्ण हिंदू त्योहार है। यह त्योहार मुख्य रूप से तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और श्रीलंका में तमिल हिंदुओं द्वारा मनाया जाता है। यह व्रत हर महीने कृत्तिका नक्षत्र के दिन आता है। जिस दिन कृतिका नक्षत्र प्रबल होता है उस दिन मासिक कार्तिगाई का यह पर्व मनाया जाता है। मासिक कार्तिगाई का व्रत | masik karthigai ka vrat मासिक कार्तिगाई का व्रत हर महीने कृत्तिका नक्षत्र के दिन रखा जाता है। दक्षिण भारतीय परंपरा में इस व्रत का विशेष महत्व है। ऐसी मान्यता है कि इस व्रत को करने से जीवन ... Read more - [काशी में पिंडदान का महत्व](https://hindumystery.com/kaashi-me-pind-daan-ka-mahatva/): पिंडदान पितरों की आत्मा की शांति और सदगति (मोक्ष) के लिए किया जाने वाला एक श्राद्ध कर्म है। काशी में पिंडदान का महत्व बहुत ही विशेष है। इस श्राद्ध कर्म में चावल या जौ का आटा, काला तिल, घी और जल आदि से पिंड बनाकर पितरों को अर्पित किया जाता है। काशी में पिंडदान करने की मान्यता इतनी अधिक इसीलिए है क्योंकि इसे मोक्षदायिनी भूमि कहा गया है। काशी में पिंडदान का महत्व | kashi me pind daan ka mahatva काशी में पिंडदान का बहुत ही गहरा धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व है। काशी में पिंडदान करने से पितरों को मोक्ष की ... Read more - [शास्त्रों के अनुसार पति के कर्तव्य](https://hindumystery.com/shashtron-ke-anusaar-pati-ke-kartavya/): हिन्दू शास्त्रों के अनुसार पति के कर्तव्य बताए गए हैं। ये कर्तव्य न केवल परिवार के भरण-पोषण से संबंधित हैं, बल्कि पत्नी के प्रति सम्मान, सुरक्षा और धार्मिक जिम्मेदारियों से भी जुड़े हैं। हिन्दू धर्म में विवाह को एक संस्कार बताया गया है, और इसमें पति-पत्नी दोनों के कुछ विशेष कर्तव्य निर्धारित किए गए हैं। शास्त्रों के अनुसार पति के कर्तव्य | shashtron ke anusar pati ke kartavya शास्त्रों के अनुसार अपनी पत्नी की रक्षा करने और उसे सम्मान देने के साथ ही उसके पालन-पोषण का उत्तरदायित्व निभाना पति के कर्तव्य हैं। साथ ही पत्नी के साथ धर्म, अर्थ और काम ... Read more - [पृथ्वी दिवस कब और क्यों मनाया जाता है](https://hindumystery.com/prithvi-divas-kab-or-kyun-manaya-jata-hai/): पृथ्वी दिवस एक वैश्विक आयोजन है। यह दिन हमें हमारी धरती और उसके पर्यावरण की रक्षा करने की प्रेरणा देता है। पृथ्वी दिवस कब और क्यों मनाया जाता है। आज इसके बारे में हम आपको विस्तारपूर्वक बताएँगे। आपको पृथ्वी दिवस के इतिहास से जुड़ी जानकारी भी मिलेगी। पृथ्वी दिवस कब और क्यों मनाया जाता है पृथ्वी दिवस हर साल 22 अप्रैल को मनाया जाता है। इसे मनाने का मुख्य कारण दुनिया भर में पर्यावरण संरक्षण और पृथ्वी के प्रति जागरूकता बढ़ाना है। इस दिन का उद्देश्य लोगों को उन पर्यावरणीय चुनौतियों के बारे में शिक्षित करना है जिनका हमारा ग्रह सामना ... Read more - [क्या गर्भवती महिला हवन कर सकती है](https://hindumystery.com/kya-garbhvati-mahila-hawan-kar-sakti-hai/): गर्भवती महिला और हवन का संबंध भारतीय संस्कृति और आयुर्वेदिक दृष्टिकोण से विशेष महत्व रखता है। लेकिन क्या गर्भवती महिला हवन कर सकती है। यहाँ गर्भवती महिला और हवन के बारे में विस्तार से जानकारी दी जा रही है। क्या गर्भवती महिला हवन कर सकती है | kya garbhvati mahila hawan kar sakti hai हाँ, गर्भवती महिला हवन कर सकती है, परंपरागत रूप से यह माना जाता है कि हवन से वातावरण शुद्ध होता है और सकारात्मक ऊर्जा उत्पन्न होती है – जो गर्भवती महिला और गर्भस्थ शिशु दोनों के लिए लाभकारी होता है। आयुर्वेद और भारतीय परंपराओं में हवन को ... Read more - [मूलाधार चक्र क्यों खराब होता है](https://hindumystery.com/muladhara-chakra-kyun-kharab-hota-hai/): मूलाधार चक्र जिसे संस्कृत में “मूलाधार” कहा जाता है। क्या आप जानते हैं मूलाधार चक्र क्यों खराब होता है जो कि शरीर के सात प्रमुख चक्रों में सबसे पहला और आधारभूत चक्र होता है। यह रीढ़ की हड्डी के निचले भाग में स्थित होता है और सुरक्षा, स्थिरता और अस्तित्व की भावना के साथ ही भौतिक आवश्यकताओं से जुड़ा होता है। मूलाधार चक्र क्यों खराब होता है | muladhara chakra kyu kharab hota hai मूलाधार चक्र के खराब होने का कोई एक कारण न होकर कई कारण हो सकते हैं। अगर किसी व्यक्ति के मन में आर्थिक, पारिवारिक या सामाजिक असुरक्षा ... Read more - [छठा नवरात्र | जानिए माँ कात्यायनी की पूजा कैसे करे](https://hindumystery.com/maa-katyayani-puja-vidhi/): छठे नवरात्र के दिन माँ कात्यायनी पूजा की जाती है। माँ कात्यायनी की पूजा कैसे करे इस लेख में हम आपको बताएँगे। उन्हें शक्ति और साहस की देवी माना जाता है। ऋषि कात्यायन के घर पुत्री के रूप में जन्म लेने के कारण इनका नाम कात्यायनी पड़ा। माँ कात्यायनी की पूजा कैसे करे छठा नवरात्र माँ कात्यायनी को समर्पित होता है। इस दिन Maa Katyayani की पूजा करने से विशेष लाभ प्राप्त होते हैं। माँ की पूजा करने से पहले आवश्यक पूजा सामग्री को एकत्र कर लें जो इस प्रकार है: इसे भी पढ़ें: कात्यायनी माता की कथा सारी पूजा सामग्री ... Read more - [स्कंदमाता पूजा विधि](https://hindumystery.com/skanda-mata-puja-vidhi/): माँ स्कंदमाता, देवी दुर्गा का पाँचवाँ स्वरूप हैं, जिनकी पूजा नवरात्रि के पाँचवें दिन की जाती है। स्कंदमाता पूजा विधि में हम आपको बताएँगे कि स्कंदमाता की पूजा कैसे करनी चाहिए जिससे मातृत्व और ममता का प्रतीक माँ स्कंदमाता प्रसन्न हो जाएँ और अपने भक्तों पर कृपा करें। “स्कंदमाता” का अर्थ है स्कंद (भगवान कार्तिकेय) की माता। माँ स्कंदमाता का यह रूप प्रेम, करुणा और वात्सल्य से भरा हुआ है, लेकिन साथ ही वे अपने भक्तों की रक्षा के लिए अत्यंत शक्तिशाली और क्रोधित रूप धारण करने में भी सक्षम हैं। स्कंदमाता पूजा विधि | Skandamata puja vidhi skandmata puja vidhi ... Read more - [शास्त्रों के अनुसार प्रेम क्या है](https://hindumystery.com/shashtron-ke-anusaar-prem-kya-hai/): यह सभी जानते हैं कि मानव जीवन में प्रेम का अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है। लेकिन क्या आप जानते हैं हिन्दू धर्म शास्त्रों के अनुसार प्रेम क्या है। शास्त्रों में प्रेम किसे कहा गया है। प्रेम से ही रिश्ते बनते हैं, जो जीवन को खुशहाल और सार्थक बनाते हैं। यह न केवल संबंधों को मजबूत बनाता है, बल्कि जीवन में आनंद, शांति और संतोष भी प्रदान करता है। तो चलिए आपको बताते हैं हमारे धर्म शास्त्रों में प्रेम के बारे में क्या दृष्टिकोण है You may also like:- क्या विधवा माँ कन्यादान कर सकती है शास्त्रों के अनुसार प्रेम क्या है | ... Read more - [शीतला अष्टमी व्रत कैसे करें](https://hindumystery.com/sheetla-ashtami-vrat-kaise-kren/): शीतला अष्टमी का व्रत मुख्य रूप से माता शीतला देवी को समर्पित होता है। होली के बाद वाली अष्टमी पर होने वाला शीतला अष्टमी व्रत कैसे करें आज हम आपको विस्तारपूर्वक बताएँगे। इस दिन बासी भोजन खाने और ताजा भोजन न पकाने की परंपरा होती है। इसे बासोड़ा पूजन, बासौदा पूजन भी कहते हैं। शीतला अष्टमी व्रत कैसे करें | sheetla ashtami vrat kaise kren शीतला अष्टमी व्रत करने के लिए सबसे पहले हम आवश्यक पूजा सामग्री को एकत्रित करेंगे: शीतला अष्टमी व्रत करते समय सबसे पहले व्रत से एक दिन पहले ही माँ को भोग लगाने के लिए नहा-धोकर सात्विक ... Read more - [varaha dwadashi ki katha](https://hindumystery.com/varaha-dwadashi-ki-katha/): varaha dwadashi के दिन वराह देव ने माता पृथ्वी को हिरण्याक्ष नामक दैत्य से बचाया था। इस दिन भगवान् वराह की पूजा करने और varaha dwadashi ki katha सुनने से भक्तों को समस्त पापों से मुक्ति और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। वराह अवतार भगवान् विष्णु का दूसरा अवतार है। वराह द्वादशी माघ मास के शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि को मनाई जाती है। जो भक्त इस दिन भगवान् वराह की पूजा करते है, उन्हें अच्छे स्वास्थ्य के साथ शांति और समृद्धि की प्राप्ति होती है। You may also like:- अपने मन को शांत कैसे करे varaha dwadashi ki katha | वराह ... Read more - [गायत्री मंत्र का अर्थ व महिमा क्या है](https://hindumystery.com/gayatri-mantra-ka-arth-mahima/): हिन्दू धर्म में सभी लोग जानते हैं कि गायत्री मंत्र एक अत्यंत पवित्र और शक्तिशाली मंत्र है। लेकिन गायत्री मंत्र का अर्थ व महिमा क्या है, यह बहुत ही कम लोग जानते हैं। इसे वेदों का सार भी कहा जाता है और इसे “माँ गायत्री” का आह्वान माना जाता है, जो ज्ञान, बुद्धि और प्रकाश की देवी हैं।गायत्री मंत्र एक सार्वभौमिक मंत्र है, जो सभी देवी-देवताओं का सार है।यह एक महामंत्र है इसे वेदों की माता भी कहा जाता है। You may also like:- गायत्री मंत्र जाप करने के नियम क्या हैं गायत्री मंत्र का अर्थ व महिमा | Gayatri mantra ... Read more - [घर में पितरों का स्थान कैसे बनायें](https://hindumystery.com/ghar-me-pitron-ka-sthan-kaise-banaye/): पितरों का हमारे जीवन में महत्वपूर्ण स्थान है। पितृ पक्ष में उनका श्राद्ध और तर्पण करने से उनका आशीर्वाद बना रहता है। घर में पितरों का स्थान कैसे बनायें, आज इस लेख में हम आपको बताएँगे। घर में पितरों का स्थान बनाने के लिए कुछ बातों का ध्यान रखना आवश्यक है। You may also like:- क्या आप जानते हैं|श्राद्ध कब नहीं करना चाहिए घर में पितरों का स्थान कैसे बनायें | ghar me pitron ka sthan kaise banayen भारत में आमतौर पर यह माना जाता है कि पितरों की कृपा के बिना आप कुछ भी नहीं कर पाएंगे। यदि आपके पितृ ... Read more - [किसी पर जिन का असर है या जादू है कैसे पता चलेगा](https://hindumystery.com/kisi-par-jin-ka-asar-hai-ya-jadu-hai-kaise-pta-chalega/): यदि हम जानना चाहते हैं किसी पर जिन का असर है या जादू है कैसे पता चलेगा, तो यह पता लगाने के लिए कुछ बातों पर ध्यान दिया जा सकता है। किसी व्यक्ति पर जिन का असर है या जादू किया गया है, तो उस व्यक्ति में कुछ असामान्य लक्षण देखे जा सकते हैं। किसी पर जिन का असर है या जादू है कैसे पता चलेगा | kisi par jin ka asar hai ya jadu hai kaise pta chalega अगर किसी व्यक्ति पर जिन या काले जादू का असर हो तो, इसके लिए यहां कुछ संकेत दिए जा रहे हैं जिनसे ... Read more - [शिवरात्रि के दिन क्या हुआ था](https://hindumystery.com/shivratri-ke-din-kya-hua-tha/): महाशिवरात्रि का त्योहार भगवान शिव को समर्पित है। यह हर साल फाल्गुन महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाया जाता है। लेकिन शिवरात्रि के दिन क्या हुआ था। इस विषय को लेकर लोगों में स्पष्टता नहीं है। महाशिवरात्रि का अर्थ है ‘शिव की महान रात’। इस दिन भगवान शिव की विशेष पूजा अर्चना की जाती है और व्रत रखा जाता है और इस साल महाशिवरात्रि की तिथि 26 फरवरी 2025 है। You may also like:- शिवलिंग पर दूध और जल क्यों चढ़ाते हैं जानिये इसका विज्ञान शिवरात्रि के दिन क्या हुआ था | shivratri ke din kya hua tha ... Read more - [विजया एकादशी की आरती](https://hindumystery.com/viajya-ekadashi-ki-aarti/): विजया एकादशी फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी को मनाई जाती है। व्रत में पूजा के बाद विजया एकादशी की आरती का विशेष महत्व होता है। विजया एकादशी को विशेष रूप से पापों से मुक्ति, विजय प्राप्ति और मोक्ष प्रदान करने वाली एकादशी माना जाता है। You may also like:- जय अम्बे गौरी मैया जय श्यामा गौरी आरती विजया एकादशी की आरती | Vijaya ekadashi ki aarti विजया एकादशी की आरती लिखित में: ॐ जय एकादशी माता मैया जय एकादशी माता। विष्णु पूजा व्रत धारण कर विष्णु पूजा व्रत धारण कर शक्ति मुक्ति पाता।।ॐ जय एकादशी माता ।। ॐ ।।तेरे ... Read more - [गायत्री मंत्र जाप करने के नियम क्या हैं](https://hindumystery.com/gayatri-mantra-jaap-karne-ke-niyam/): गायत्री मंत्र को वेदों का सबसे महत्वपूर्ण और शक्तिशाली मंत्र माना जाता है। हिन्दू शास्त्रों में गायत्री मंत्र जाप करने के नियम बताये गए हैं। गायत्री मंत्र का जाप करते समय इन नियमों का पालन अवश्य करना चाहिए। यह मंत्र सूर्य देवता को समर्पित है और व्यक्ति की बुद्धि, आत्मा और जीवन को शुद्ध और प्रकाशित करने में सहायता करता है। गायत्री मंत्र जाप करने के नियम | gayatri mantra jaap karne ke niyam गायत्री मंत्र जाप करने के नियम के अनुसार मंत्र जाप का उत्तम समय ब्रह्म मुहूर्त (सुबह 4 बजे से 5:30 बजे तक) है इसके साथ दोपहर और ... Read more - [गायत्री मंत्र के नुकसान क्या हैं](https://hindumystery.com/gayatri-mantra-ke-nuksan/): गायत्री मंत्र एक पवित्र वैदिक मंत्र है, जिसे बहुत शक्तिशाली और सकारात्मक प्रभाव वाला माना जाता है। हालांकि, कुछ परिस्थितियों में गायत्री मंत्र के नुकसान भी हो सकते हैं। जैसे गलत तरीके से जाप करना या अनुचित पालन करने से कुछ नकारात्मक प्रभाव हो सकते हैं। यहाँ कुछ संभावित गायत्री मंत्र के नुकसान बताए गए हैं। गायत्री मंत्र के नुकसान क्या हैं | gayatri mantra ke nuksaan kya hain गलत उच्चारण, अशुद्ध मन और अनाधिकार गायत्री मंत्र का जाप करने पर इससे नुक्सान होने लगते हैं। शारीरिक बीमारियां उत्पन्न होती हैं, संपत्ति का ह्रास होता है, अग्नि दाह का भय बना ... Read more - [टोना टोटका क्या होता है](https://hindumystery.com/tona-totka-kya-hota-hai/): आज इस लेख में हम आपको बताएँगे टोना टोटका क्या होता है। टोना-टोटका एक पारंपरिक और धार्मिक विश्वास से जुड़ा हुआ शब्द है। इसमें लोग बुरी शक्तियों या आत्माओं को वश में करने या उनसे सुरक्षा पाने के लिए विभिन्न प्रकार के रीति-रिवाजों और उपायों का उपयोग करते हैं। You may also like:- जादू टोने से बचने के लिए क्या करें टोना टोटका क्या होता है | tona-totka kya hota hai टोना और टोटका दो अलग चीजें हैं। टोना किसी व्यक्ति को हानि पहुँचाने के लिए किया जाता है। लोग इसे काला जादू के नाम से भी जानते हैं। जबकि टोटका ... Read more - [बसंत पंचमी का आध्यात्मिक महत्व क्या है](https://hindumystery.com/basant-panchami-ka-adhyatmik-mehetv/): बसंत पंचमी माँ सरस्वती की उपासना का दिन है, जो विद्या, संगीत और कला की देवी हैं। बसंत पंचमी का आध्यात्मिक महत्व भी होता है। यह पर्व माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाया जाता है और इसे ज्ञान, विद्या, और संगीत की देवी माँ सरस्वती की उपासना के रूप में विशेष स्थान प्राप्त है। You may also like:- मकर संक्रांति कैसे मनाया जाता है बसंत पंचमी का आध्यात्मिक महत्व | basant panchami ka adhyatmik mahatv बसंत पंचमी का आध्यात्मिक महत्व बहुत गहरा और व्यापक है। बसंत पंचमी आध्यात्मिक रूप से ज्ञान, बुद्धि और आत्मजागृति का प्रतीक है। ... Read more - [विधवाओं के बारे में वेद क्या कहते हैं](https://hindumystery.com/vidhwaon-ke-bare-me-ved-kya-kehte-hai/): वेदों में कहीं भी यह उल्लेख नहीं है कि विधवाएं अशुद्ध या अशुभ होती हैं। आज हम आपको बतायंगे कि विधवाओं के बारे में वेद क्या कहते हैं। वेदों में विधवाओं को समाज का महत्वपूर्ण हिस्सा माना गया है और उन्हें समानता, स्वतंत्रता, और अधिकार दिए गए हैं। विधवाओं के बारे में वेद क्या कहते हैं | vidhvaon ke bare me ved kya kehete hain वेदों में विधवाओं के विषय में एक सकारात्मक दृष्टिकोण मिलता है। वेदों में विधवाओं को समाज का एक सम्मानित हिस्सा कहा गया है और उन्हें आत्मनिर्भरता, पुनर्विवाह, और समाज में स्वतंत्र रूप से जीवन जीने का ... Read more - [मकर संक्रांति कैसे मनाया जाता है](https://hindumystery.com/makar-sankranti-kaise-manaya-jata-hai/): मकर संक्रांति जो कि एक महत्वपूर्ण हिंदू त्योहार है और हर साल जनवरी माह के मध्य में मनाया जाता है। इस लेख में हम आपको बताएँगे मकर संक्रांति कैसे मनाया जाता है। यह पर्व सूर्य के मकर राशि में प्रवेश करने और शीत ऋतु के समाप्त होने का प्रतीक है। इसे कृषि और प्रकृति के प्रति आभार प्रकट करने का भी अवसर माना जाता है। विभिन्न राज्यों में इस पर्व को अलग-अलग नामों से जाना जाता है और अलग-अलग परंपराओं के साथ मनाया जाता है। यह उत्सव सूर्य की उपासना, नई फसल की खुशी और सामूहिक उत्सव का प्रतीक है। मकर ... Read more - [क्या विधवा माँ कन्यादान कर सकती है](https://hindumystery.com/kya-vidhwa-maa-kanyadaan-kar-sakti-hai/): परंपरागत रूप से, हिंदू धर्म में कन्यादान को पिता का अधिकार माना जाता है। लेकिन क्या विधवा माँ कन्यादान कर सकती है। समय के साथ धार्मिक विचारों में बदलाव आए हैं और लोग यह जानना चाहते हैं, एक विधवा स्त्री क्या अपनी पुत्री का कन्यादान कर सकती है। आज के बदलते सामाजिक परिवेश में लोगों का यह भी मानना है कि कन्यादान एक धार्मिक अनुष्ठान है और इसका मुख्य उद्देश्य पुत्री के सुखी जीवन की कामना करना है। यदि विधवा माँ भी इसी भावना से कन्यादान करती है, तो इसमें कोई हर्ज नहीं है। वहीँ दूसरी तरफ हिन्दू शास्त्रों में इसके ... Read more - [माथे पर तिलक लगाने का वैज्ञानिक रहस्य](https://hindumystery.com/mathe-par-tilak-lagane-ka-vaigyanik-rahasya/): हिन्दू धर्म में माथे पर तिलक लगाना एक सदियों पुरानी परंपरा तो है ही, लेकिन क्या आप माथे पर तिलक लगाने का वैज्ञानिक रहस्य जानते हैं। हम यह कह सकते हैं कि किसी व्यक्ति का माथे पर तिलक लगाना उसके हिन्दू होने की धार्मिक पहचान भी है। हिन्दू धर्म में माथे पर तिलक लगाना केवल मात्र एक परंपरा ही नहीं है बल्कि इसके कई वैज्ञानिक कारण भी हैं। इस लेख में हम आपको माथे पर तिलक लगाने का वैज्ञानिक रहस्य बताएँगे। You may also like:- योग डंडा क्या है इसका प्रयोग कैसे करें माथे पर तिलक लगाने का वैज्ञानिक रहस्य | ... Read more - [अनाहत चक्र कैसे जागृत करें](https://hindumystery.com/anahata-chakra-kaise-jagrit-kre/): अनाहत चक्र मानव शरीर के प्रमुख सात चक्रों में से एक है। आज इस लेख में हम आपको बताएँगे कि अनाहत चक्र कैसे जागृत करें, anahata chakra kaise jagrit kare. साथ ही इस लेख से आप अनाहत चक्र के फायदे भी जानेंगे।अनाहत चक्र को हृदय चक्र भी कहा जाता है। अनाहत चक्र का प्रतीक पशु हिरण है। अनाहत चक्र का रंग हरा होता है और इस चक्र का तत्व वायु है। You may also like:- आज्ञा चक्र को कैसे जागृत करें अनाहत चक्र हमारे शरीर के सातों चक्रों की पंक्ति के मध्य में स्थित चक्र होता है। यह हमारे आस पास ... Read more - [क्या विधवा से शादी करना ठीक है](https://hindumystery.com/kya-vidhwa-se-shadi-karna-theek-hai/): विधवा स्त्री के जीवन से जुड़े बहुत से सवाल समाज में उठते रहते हैं जैसे: क्या विधवा से शादी करना ठीक है, क्या विधवा स्त्री हवन कर सकती है ऐसे कई अन्य प्रश्न हैं जिनका उत्तर हम आपको अपने इस लेख में देंगे। विधवा का जीवन कई चुनौतियों से भरा हो सकता है। आज के युग में इन चुनौतियों से निपटने और एक पूर्ण जीवन जीने के कई रास्ते उपलब्ध हैं। एक विधवा स्त्री का जीवन सामाजिक, सांस्कृतिक और व्यक्तिगत परिस्थितियों पर निर्भर करता है। पुराने समय में विधवा स्त्रियों के साथ प्रायः कठोर और असमानता पूर्ण व्यवहार किया जाता था। ... Read more - [क्या मृत्यु के बाद संबंध समाप्त हो जाते हैं](https://hindumystery.com/kya-mrityu-ke-bad-samandh-samapt-ho-jate-hai/): इस सृष्टि में जिसका जन्म हुआ है उसकी मृत्यु होनी ही है, यह अटल है। लेकिन प्रश्न यह है, क्या मृत्यु के बाद संबंध समाप्त हो जाते हैं। जिन माता-पिता ने आपको जन्म दिया, जिन भाई – बहनों के साथ आप खेल कूद के बड़े हुए है, आपके दोस्त, आपकी पत्नी, आपके बच्चे। क्या ये सभी रिश्ते आपकी मृत्यु के बाद ख़त्म हो जायेंगे। आज इस लेख में हम इस विषय पर चर्चा करेंगे और आपको बताएँगे कि हिन्दू शास्त्रों और धर्मग्रंथों में इस बारे में क्या लिखा है। You may also like:- किस पाप के कारण स्त्री विधवा होती है ... Read more - [किस पाप के कारण स्त्री विधवा होती है](https://hindumystery.com/kis-paap-ke-karan-stree-vidhwa-hoti-hai/): किसी स्त्री का विधवा हो जाना जीवन की एक बड़ी त्रासदी है। क्या आप जानते हैं किस पाप के कारण स्त्री विधवा होती है। किसी भी महिला द्वारा अपने लिए एक विधवा जीवन की कल्पना करना भी भयावह होता है। हिन्दू धर्मग्रंथों में इस विषय का वर्णन भी मिलता है। गरुड़ पुराण में बताया गया है कि स्त्री के विधवा होने का क्या कारण है। You may also like:- मृत्यु होने पर क्या दामाद ससुर का अंतिम संस्कार कर सकता है किस पाप के कारण स्त्री विधवा होती है | kis paap ke karan stree vidhwa hoti hai गरूर पुराण के ... Read more - [आज्ञा चक्र को कैसे जागृत करें](https://hindumystery.com/agya-chakra-ko-kaise-jagrit-kare/): आज्ञा चक्र का संबंध अंतर्दृष्टि, मानसिक स्पष्टता, और आध्यात्मिक जागरूकता से है। आज्ञा चक्र को कैसे जागृत करें यह जान लेने के बाद आप आज से ही आज्ञा चक्र के जागरण का अभ्यास शुरू कर सकते हैं। आज्ञा चक्र, मानव शरीर के सात प्रमुख चक्रों में से एक है। इसे तीसरी आँख भी कहते हैं और आज्ञा चक्र के देवता शिव हैं। यह माथे के बीचोंबीच, भौहों के ठीक ऊपर स्थित होता है। You may also like:- मूलाधार चक्र जागृत कैसे करें आज्ञा चक्र को कैसे जागृत करें|Agya chakra kaise jagrit kare यदि आप अपने आज्ञा चक्र को जागृत करना चाहते ... Read more - [जादू टोने से बचने के लिए क्या करें](https://hindumystery.com/jadu-tone-se-bachne-ke-liye-kya-kren/): सभी ने अपने जीवन में कभी न कभी यह सुना होगा कि उनके किसी जानकारी वाले या मोहल्ले – पड़ोस के किसी व्यक्ति पर किसी ने जादू टोना कर दिया और उसकी सही से चलने वाली जिंदगी अनेकों परेशानियां आ गयीं उसकी निजी जिंदगी या फिर उसका अच्छा खासा चलने वाला व्यापर लगभग बर्बादी की कगार पर पहुँच गया। हमें नहीं पता होता की कब हमसे दुश्मनी रखने वाला या हमारी कामयाबी से चिढ़ने वाला हम पर कोई जादू टोना करवा देगा। इसीलिए जादू टोने से बचने के लिए क्या करें ये उपाय हमें पता होने चाहिए। हम किसी को जादू ... Read more - [अपने मन को शांत कैसे करे](https://hindumystery.com/man-ko-shant-kaise-kre/): कभी-कभी रोज़ाना के जीवन की चिंताएं, योजनाएं आदि आप पर तेजी से हावी हो जाती हैं ऐसे में अपने मन को शांत कैसे करे और अपने विचारों पर काबू कैसे पाएं यह जानने के बाद आप अपने मन को शांत रखने में सफल हो पाएंगे और आपका स्वयं पर नियंत्रण भी स्थापित होगा। मन को शांत रखना कई कारणों से बहुत जरूरी है, क्योंकि यह न केवल आपके मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य को प्रभावित करता है, बल्कि आपके जीवन की गुणवत्ता को भी बढ़ाता है। आज इस लेख में हम आपको विस्तारपूर्वक बताएँगे Apne man ko shant kaise kre. इसे भी ... Read more - [योग डंडा क्या है इसका प्रयोग कैसे करें](https://hindumystery.com/yog-dunda-kya-hai/): हिन्दू परंपरा में प्राचीन काल से ही ऐसे कई नियमों और उपकरणों आदि का प्रयोग किया जाता रहा है जो मानव जीवन को दिन प्रतिदिन बेहतर बनाने में सहायक होते हैं। किन्तु आज के समय में हम अपनी उस समृद्ध परंपरा को भूलते जा रहे हैं। आज हम आपके लिए अपनी उस समृद्ध परम्परा से एक ऐसे ही उपकरण की जानकारी निकाल कर लाएं हैं जिसको आज के समय में लगभग भुला दिया गया है। आज हम आपको योग डंडा ( योग दंड ) के बारे में बताएँगे। जिसके प्रयोग के बारे में जानने के बाद आप चौंक जायेंगे। योग डंडा ... Read more - [गायत्री मंत्र की उत्पत्ति कैसे हुई](https://hindumystery.com/gayatri-mntra-ki-utpatti-kaise-hui/): हिन्दू धर्म के वेदों में इस ब्रह्माण्ड का समस्त ज्ञान समाया हुआ है। वेदों में छिपे ज्ञान को अत्यंत शक्तिशाली बताया गया है। गायत्री मंत्र को इन्हीं वेदों की माँ माना जाता है। किन्तु गायत्री मंत्र की उत्पत्ति कैसे हुई यह हमेशा ही चर्चा का विषय रहा है। आज इस लेख को पढ़ने के बाद आप जान जायेंगे की गायत्री मंत्र की उत्पत्ति कैसे हुई। धर्मग्रंथों में बताया गया है कि इस सृष्टि की शुरुआत वाक् (Sound) से हुई थी। वो sound था “ॐ” का sound । आज की वैज्ञानिक खोजों से भी यह बात सिद्ध होती है। हिन्दू धर्मग्रंथों में ... Read more - [गायत्री मंत्र के 13 गुप्त उपाय : ये उपाय आपकी जिंदगी बदल देंगे](https://hindumystery.com/gayatri-mntr-ke-13-gupt-upay/): गायत्री मंत्र, जिसे वेदों का सार माना जाता है, न केवल आध्यात्मिक शक्ति प्रदान करता है, बल्कि जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में सफलता प्राप्त करने में भी सहायक होता है।गायत्री मंत्र वेदों का एक महत्त्वपूर्ण मंत्र है और इसे हिंदू धर्म में बहुत पवित्र और शक्तिशाली माना जाता है। इस मंत्र का उच्चारण मन की शांति और आध्यात्मिक उन्नति के लिए किया जाता है। गायत्री मंत्र के 13 गुप्त उपाय निम्नलिखित हैं, जो कि पारंपरिक और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित हैं: गायत्री मंत्र के 13 गुप्त उपाय 1- यदि आप तीन शनिवार को संध्या के समय पीपल के पेड़ की जड़ ... Read more - [जय अम्बे गौरी मैया जय श्यामा गौरी आरती लिरिक्स  - Jai Ambe Gauri Maiya Jai Shyama Gauri Aarti Lyrics](https://hindumystery.com/jai-ambe-gauri-maiya-jai-shyama-gauri-aarti-lyrics/): जय अम्बे गौरी आरती लिरिक्स जय अम्बे गौरी मैया जय श्यामा गौरी  तुमको निसदिन ध्यावत  मैयाजी को निसदिन ध्यावत हरि ब्रम्हाशिवरी   ओम जय अम्बे गौरी  मांग सिंदूर विराजत टीको मृगमद को  उज्ज्वल से दो नैना चंद्रवदन नीको  ओम जय अम्बे गौरी कनक समान कलेवर रक्ताम्बर राजै  रक्तपुष्प गलमाला कण्ठन पर साजै  ओम जय अम्बे गौरी केहरि वाहन राजत खड्ग खप्परधारी   सुर नर मुनि जन सेवत तिनके दुखहारी  ओम जय अम्बे गौरी कानन कुण्डल शोभित नासाग्रे मोती  कोटिक चन्द्र दिवाकर  सम राजत ज्योति  ओम जय अम्बे गौरी शुम्भ-निशुम्भ बिदारे महिषासुर घाती  धूम्र विलोचन नैना निशदिन मदमाती  ओम जय अम्बे गौरी चण्ड-मुण्ड संहारे शोणित ... Read more - [मूलाधार चक्र जागृत कैसे करें](https://hindumystery.com/mooladhaar-chakra-jagrat-kaise-krein/): मूलाधार चक्र, इसे रूट चक्र भी कहा जाता है। मूलाधार का मतलब है मूल आधार, यह हमारे भौतिक ढांचे का आधार है। यह हमारे शरीर में स्थित सात चक्रों में से सबसे महत्वपूर्ण है। हमारे शरीर की ऊर्जा इसी चक्र में केंद्रित रहती है। यदि हम अपने जीवनकाल में इस मूलाधार चक्र को जाग्रत न कर पाए तो हम अपने जीवन में, ऐसा बहुत कुछ जो जो हासिल नहीं कर पाएंगे और इसी भौतिक आसक्ति में जीवन जी कर चले जाएंगे। इसीलिए आज इस लेख में हम आपको बताएँगे कि muladhara chakra ko kaise jagrit kare. आगे हम आपको बताएँगे कि, हम ... Read more - [हनुमान जयंती के विशेष उपाय दिलाएंगे आपको सभी समस्याओं से छुटकारा](https://hindumystery.com/hanuman-jayanti-ke-vishesh-upay/): हनुमान जयंती के विशेष उपाय: हनुमान जयंती 12 अप्रैल 2025 को है। हनुमान जयंती प्रतिवर्ष चैत्र मास की पूर्णिमा तिथि को मनाई जाती है। पौराणिक कहानियों में कहा गया है कि हनुमान जी श्री राम के परम भक्त थे। बजरंगबली के बारे में कहा जाता है कि जो साधक सच्चे मन से हनुमान जी की उपासना करता है, वह सफल होता है। उसकी सभी पीड़ा दूर हो जाती है। आज हम बताएँगे कि आपको हनुमान जयंती पर क्या उपाय करना चाहिए। जिससे आपको अपने जीवन की सभी समस्याओं से छुटकारा मिले और आप सुखी जीवन जियें। इसे भी पढ़ें: हनुमान जयंती ... Read more - [हनुमान जयंती 2025](https://hindumystery.com/hanumaan-jayanti/): हनुमान जयंती 2025: भगवान् हनुमान के जन्मोत्सव को हनुमान जयंती के रूप में मनाया जाता है। यह भगवान राम के भक्त और हिंदू धर्म के सबसे शक्तिशाली देवताओं में से एक बजरंगबली का जन्मदिन है। हनुमान जयंती हिंदू धर्म के सबसे महत्वपूर्ण त्योहारों में से एक है। हनुमान जयंती डेट: हनुमान जयंती प्रतिवर्ष चैत्र मास की पूर्णिमा तिथि को मनाई जाती है। इस वर्ष हनुमान जयंती 12 अप्रैल 2025 को मनाई जाएगी। पौराणिक कथाओं के अनुसार हनुमान जी श्री राम के परम भक्त हैं। बजरंगबली के बारे में कहा जाता है कि जो साधक सच्चे मन से हनुमान जी की उपासना ... Read more - [माँ कालरात्रि की कथा](https://hindumystery.com/maa-kalratri-ki-katha/): नवरात्रि के सातवें दिन माँ कालरात्रि की पूजा की जाती है। इनका नाम ही दर्शाता है कि ये अंधकार का नाश करने वाली देवी हैं। माँ के केश बिखरे हुए हैं और गले में हड्डियों की माला है। माँ कालरात्रि के नाम से हमें माँ के रूप के भयानक होने का पता चलता है। माँ कालरात्रि की कथा | Maa Kalratri ki katha Maa Kalratri ki katha- एक बार दानवों के राजा शुम्भ-निशुम्भ और रक्तबीज ने तीनों लोकों में आतंक मचा दिया। देवताओं को उनके अत्याचार से मुक्ति दिलाने के लिए माँ दुर्गा ने राक्षसों से युद्ध किया। जब रक्तबीज नामक ... Read more - [कात्यायनी माता की कथा| katyayni mata ki katha](https://hindumystery.com/katyayni-mata-ki-katha/): नवरात्रि के छठे दिन माँ कात्यायनी की पूजा की जाती है। देवी कात्यायनी माँ दुर्गा का ही छठा स्वरूप हैं। कात्यायनी माँ का स्वरूप माँ कात्यायनी का स्वरुप तेजमय है। माँ कात्यायनी चतुर्भुजा धारी हैं। माँ का एक हाथ अभय मुद्रा में रहता है, दूसरा हाथ वरमुद्रा में, माँ ने एक हाथ में तलवार धारण कर रखी है और एक हाथ में कमल का फूल सुशोभित रहता है। माँ कात्यायनी सिंह पर सवार रहती हैं। कात्यायनी माता की कथा ऋषि कात्यायन देवी दुर्गा के परम भक्त थे। उन्होंने कई वर्षों तक माँ दुर्गा की कठोर तपस्या की। उनकी तपस्या से प्रसन्न ... Read more - [पाँचवा नवरात्र स्कंदमाता की कथा](https://hindumystery.com/skandmata-ki-katha/): माँ स्कंदमाता दुर्गाजी का पांचवा स्वरूप हैं, जिनकी पूजा नवरात्रि के पांचवे दिन की जाती है। आइए जानते हैं स्कंदमाता की कथा (Skandmata ki Katha) पौराणिक कथाओं के अनुसार, स्कंदमाता भगवान कार्तिकेय की माता हैं, जिन्हें स्कन्द कुमार भी कहा जाता है। इसी कारण उन्हें स्कंदमाता नाम प्राप्त हुआ। स्कंदमाता को सिंह पर विराजमान देवी के रूप में दर्शाया जाता है. उनके चार भुजाएं हैं। ऊपर के दो हाथों में कमल का पुष्प और तीसरे हाथ में स्कन्द (कार्तिकेय) बालक को वात्सल्यपूर्वक गोद में लिए हुए हैं और चौथा हाथ वर मुद्रा में है। स्कंदमाता को शक्ति, वात्सल्य और मातृत्व की ... Read more - [आज है चौथा नवरात्र है|माँ कुष्मांडा पूजन](https://hindumystery.com/maa-kushmanda-katha-pujan-aarti/): 22 मार्च 2026- नवरात्रि के चौथे दिन माँ कुष्मांडा की पूजा की जाती है। इस बार चौथा नवरात्र नवरात्रत 22 मार्च को मनाया जायेगा। चौथे नवरात्र पर माँ कुष्मांडा की पूजा अर्चना की जाती है। देवी का यह स्वरूप अत्यंत दिव्य और शक्तिशाली है। माँ कुष्मांडा को ‘आदिशक्ति’ भी कहा जाता है। देवी माँ के इस रूप के बारे में मान्यता यह है कि माँ कुष्मांडा ने ही संसार की रचना करी थी माँ कुष्मांडा की कथा | Maa Kushmanda ki katha नवरात्र का चौथा दिन माँ कुष्मांडा को समर्पित होता है। कुष्मांडा देवी की कथा इस प्रकार है : माँ ... Read more - [ब्रह्मचारिणी माता की आरती](https://hindumystery.com/brahmcharini-mata-ki-arti/): ब्रह्मचारिणी माता की आरती | brahmacharini mata aarti जय अंबे ब्रह्माचारिणी माता।जय चतुरानन प्रिय सुख दाता। ब्रह्मा जी के मन भाती हो।ज्ञान सभी को सिखलाती हो। ब्रह्मा मंत्र है जाप तुम्हारा।जिसको जपे सकल संसारा। जय गायत्री वेद की माता।जो मन निस दिन तुम्हें ध्याता। कमी कोई रहने न पाए।कोई भी दुख सहने न पाए।  उसकी विरति रहे ठिकाने।जो ​तेरी महिमा को जाने। रुद्राक्ष की माला ले कर।जपे जो मंत्र श्रद्धा दे कर। आलस छोड़ करे गुणगाना।मां तुम उसको सुख पहुंचाना। ब्रह्माचारिणी तेरो नाम।पूर्ण करो सब मेरे काम। भक्त तेरे चरणों का पुजारी।रखना लाज मेरी महतारी। (Disclaimer: The material on hindumystery.com website ... Read more - [ब्रह्मचारिणी माता की कथा](https://hindumystery.com/brahmcharini-mata-ki-katha/): नवरात्रि के दूसरे दिन, माँ ब्रह्मचारिणी की पूजा की जाती है। कुछ स्थानों पर पूजा के साथ ही माँ ब्रह्मचारिणी की कथा पढ़ी, सुनाई जाती है। माँ ब्रह्मचारिणी, देवी दुर्गा के नौ रूपों में से दूसरा रूप हैं। माँ के इस रूप का नाम “ब्रह्मचारीणी” इसलिए पड़ा क्योंकि वे कठोर तपस्या करने वाली हैं। ब्रह्मचारिणी माता की कथा | Brahmacharini Mata ki katha नवरात्री का दूसरा दिन माँ ब्रह्मचारिणी को समर्पित होता है। माँ ब्रह्मचारिणी के नाम में ब्रह्म शब्द का अर्थ तपस्या से है। माँ की इस रूप में उपासना करने से मनुष्य में तप, त्याग, संयम और सदाचार की ... Read more - [Bhalachandra Sankashti Chaturthi 2025: भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी व्रत कथा](https://hindumystery.com/bhalachandra-sankashti-chaturthi/): भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी एक महत्वपूर्ण व्रत है जो भगवान गणेश को समर्पित है। यह त्यौहार हर महीने कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाया जाता है। भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी 2025 तिथि 2025 में, भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी की तिथि 17 मार्च है। भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी व्रत कथा | Bhalachandra Sankashti Chaturthi vrat katha भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी व्रत कथा के अनुसार पुराने समय की बात है, एक गाँव में गरीब ब्राह्मण था। ब्राह्मण अपनी पत्नी और बच्चों के साथ गाँव में रहता था। वे लोग बहुत गरीब थे। कई बार ऐसा होता था की उन्हें भूखे रहकर ही दिन गुजरना पड़ता था। इन ... Read more - [प्रदोष व्रत कैलेंडर 2025 list](https://hindumystery.com/pradosh-vrat-list/): प्रदोष व्रत कैलेंडर 2025 list – प्रदोष व्रत भगवान् शिव को समर्पित है। इस दिन भगवान शिव की पूजा की जाती है। प्रदोष व्रत 2025 लिस्ट से आपको इस वर्ष के सभी प्रदोष व्रत की जानकारी मिल जयेगी। प्रदोष व्रत को “प्रदोषम” नाम से भी जाना जाता है। प्रदोष व्रत कैलेंडर 2025 list प्रदोष व्रत सूची तिथि प्रदोष व्रत दिन Pradosh vrat january 2025 11 जनवरी 2025 शनि प्रदोष व्रत शनिवार Pradosh vrat january 2025 27 जनवरी 2025 सोम प्रदोष व्रत सोमवार Pradosh vrat Feb 2025 09 फ़रवरी 2025 रवि प्रदोष व्रत रविवार Pradosh vrat Feb 2025 25 फरवरी 2025 भौम ... Read more - [Kuber Ji Ki Aarti: कुबेर महाराज की ये आरती रोज़ करने से जीवन में धन की कमी नहीं होगी](https://hindumystery.com/kuber-ji-ki-aarti/): जैसे माँ लक्ष्मी धन की देवी हैं उसी तरह कुबेर महाराज सभी देवताओं के कोषाध्यक्ष हैं। वे उत्तर दिशा के लोकपाल और यक्षों के राजा हैं। कुबेर महाराज की पूजा धनतेरस और दिवाली के दिन विशेष रूप से की जाती है। दीवाली से पहले धनतेरस के दिन माता लक्ष्मी के साथ कुबेर महाराज की पूजा और उसके बाद Kuber Ji Ki Aarti करना विशेष रूप से फलदायी माना जाता है। इसे भी पढ़ें : Kuber Ji Ki Aarti कुबेर महाराज बहुत दयालु और उदार हैं। वे अपने भक्तों की रक्षा करते हैं और उन्हें धन-धान्य से संपन्न करते हैं। कुबेर महाराज ... Read more - [Skandmata ki Aarti | स्कंदमाता की आरती](https://hindumystery.com/skandmata-ki-aarti/): Skandmata ki Aarti : स्कंदमाता नवरात्रि के पांचवें दिन की देवी हैं। वे भगवान स्कंद की माता हैं, जिन्हें कार्तिकेय के नाम से भी जाना जाता है। पांचवें नवरात्र पर पूर्ण विधि-विधान से स्कंदमाता की पूजा करने के बाद Skandmata ki Aarti अवश्य करें। इससे माँ प्रसन्न होतीं हैं। इसे भी पढ़ें – स्कंदमाता पूजा विधि Skandmata ki Aarti जय तेरी हो स्कंद माता।पांचवां नाम तुम्हारा आता॥सबके मन की जानन हारी।जग जननी सबकी महतारी॥तेरी जोत जलाता रहू मैं।हरदम तुझे ध्याता रहू मै॥कई नामों से तुझे पुकारा।मुझे एक है तेरा सहारा॥ कही पहाडो पर है डेरा।कई शहरों में तेरा बसेरा॥ हर मंदिर ... Read more - [Ganesh Aarti | गणेश आरती](https://hindumystery.com/ganesh-aarti/): Ganesh Aarti को गणपति आरती भी कहा जाता है, जो भगवान गणेश को समर्पित है। यह आरती भक्तों द्वारा गणेश जी की पूजा करने के बाद करी जाती है और इसे उनके प्रसन्नता के लिए गाया जाता है। Ganesh Aarti जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा।माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥ एकदंत दयावन्त, चार भुजाधारी।माथे सिंदूर सोहे, मूसे की सवारी ॥ जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा।माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥ पान चढ़े फूल चढ़े, और चढ़े मेवा ।लड्डुअन का भोग लगे, संत करें सेवा ॥ जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा।माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥ अंधन को आंख ... Read more - [Akhuratha Sankashti Chaturthi 2025](https://hindumystery.com/akhuratha-sankashti-chaturthi/): Akhuratha Sankashti Chaturthi 2025: सनातन धर्म में किसी भी तरह का व्रत-पूजन और मांगलिक कार्य शुरू करने से पहले भगवान् गणेश की पूजा-आराधना की जाती है। भगवान् गणेश को चतुर्थी तिथि का स्वामी माना जाता है। अखुरथ संकष्टी चतुर्थी को हर साल पौष माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाया जाता है। Akhuratha Sankashti Chaturthi इस दिन भगवान गणेश की पूजा-अर्चना करने से सभी कष्ट दूर होते हैं। अखुरथ संकष्टी चतुर्थी का विशेष महत्व है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन पूर्ण विधि-विधान के साथ गणेश जी की पूजा करने से ज्ञान, बुद्धि और धन-वैभव की प्राप्ति होती है। ... Read more - [दत्तात्रेय जयंती की कहानी](https://hindumystery.com/dattatreya-jayanti-ki-kahani/): Dattatreya Jayanti 2025: दत्तात्रेय जयंती हिंदू धर्म में भगवान दत्तात्रेय के जन्मदिन के रूप में मनाई जाने वाला एक त्योहार है। दत्तात्रेय जयंती की कहानी हमे बताती है कि भगवान दत्तात्रेय क विष्णु, ब्रह्मा और शिव के अंश हैं। दत्तात्रेय जयंती हर साल मार्गशीर्ष माह यानि अगहन महीने की पूर्णिमा को मनाई जाती है। सनातन धर्म में मान्यता यह है कि दत्तात्रेय की पूजा करने ब्रह्मा,विष्णु, महेश तीनों देवों का आशीर्वाद मिलता है। ajit eknaath saurce licence दत्तात्रेय जयंती की कहानी | Dattatreya Jayanti ki kahani पौराणिक कथाओं के अनुसार एक समय की बात है : नारद जी माँ पार्वती, माँ ... Read more - [Maa Laxmi Aarti](https://hindumystery.com/maa-laxmi-aarti/): मां लक्ष्‍मी की पूजा करने के बाद Maa Laxmi Aarti करने से लक्ष्मी माता की कृपा प्राप्त होती है और घर में सुख, समृद्धि और शांति आती है। श्री लक्ष्मी जी की आरती करने से कष्टों और दुखों से छुटकारा मिलता है। यहाँ हमने आपको maa laxmi aarti lyrics उपलब्ध कराएं हैं, माँ लक्ष्मी की पूजा करने के बाद Maa Laxmi Aarti करें और माँ की कृपा प्राप्त करें। Maa Laxmi Aarti | मां लक्ष्‍मी की आरती ओम् जय लक्ष्मी माता,मैया जय लक्ष्मी माता ।तुमको निसदिन सेवत,हर विष्णु विधाता ॥ ओम् जय लक्ष्मी माता…॥ उमा, रमा, ब्रम्हाणी,तुम ही जग माता ।सूर्य ... Read more - [Pradosh Vrat Katha : आज व्रत पूजन में इस कथा का पाठ करेगा सभी पापों को दूर](https://hindumystery.com/pradosh-vrat-katha/): आज है रवि प्रदोष व्रत यह एक महत्वपूर्ण व्रत है। इस दिन व्रत करने के बाद Pradosh Vrat Katha का बहुत ही महत्व होता है। प्रदोष व्रत करने के बाद Pradosh Vrat Katha सुनने/पढ़ने का बहुत ही महत्व होता है। Pradosh Vrat Katha से प्रदोष व्रत का पूर्ण लाभ प्राप्त होता है। Photo by Hari mangayil on pixabay Pradosh Vrat Katha प्राचीन काल में एक गरीब पुजारी अपने परिवार के साथ रहा करता था। कुछ समय बाद उस पुजारी की मृत्यु हो गयी। पुजारी की मृत्यु के बाद उसकी विधवा पत्नी अपने पुत्र के भरण-पोषण के लिए भीख मांगने लगी। इसी ... Read more - [घर में पितृ दोष के लक्षण क्या होते हैं](https://hindumystery.com/pitra-dosha-symptoms/): पितृ दोष के कारण व्यक्ति को कई प्रकार की समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। बहुत से ऐसे पितृ दोष के लक्षण हैं जिनसे आप अंदाज़ा लगा सकते हैं कि आपका घर पितृ दोष से प्रभावित है और आप इसके निवारण का उपाय कर सकते हैं। पितृ दोष के लक्षण | pitra dosh ke lakshan पितृ दोष ( Pitra dosha ) व्यक्ति के पूर्वजों से संबंधित होता है। आर्थिक परेशानी, शारीरिक बीमारी, मानसिक तनाव, वैवाहिक जीवन में समस्याएं, और संतान सुख में कमी या फिर घर में तुलसी माता के पौधे का सुख जाना। ये सभी घर में पितृ दोष ... Read more - [व्रत का संकल्प कैसे लें](https://hindumystery.com/vrat-ka-sankalp-kaise-lein/): घर में बहुत से व्रत और पूजा की जाती है और हमेशा पंडित जी को बुलाना संभव नहीं होता। ऐसे में आप घर में स्वयं भी व्रत संकल्प ले सकते हैं। आज आपको बताएँगे कि घर में पूजा पाठ करते समय व्रत का संकल्प कैसे लें। संकल्प का अर्थ यह है कि आप भगवान् को साक्षी मानकर यह व्रत और पूजन का कार्य कर रहे हैं और पूर्ण श्रद्धा और निष्ठा भाव के साथ आप इस पूजा को अवशय पूर्ण करेंगे। शास्त्रों में कहा गया है कि संकल्प लेने का अर्थ है कि आप ये प्रतिज्ञा लेते हैं कि आप अपनी ... Read more - [मोक्षदा एकादशी के उपाय, ये 7 उपाय करेंगे परेशानियाँ दूर, होगा धन का लाभ](https://hindumystery.com/mokshada-ekadashi-ke-upay/): Mokshada Ekadashi 2025: इस साल मोक्षदा एकादशी की तिथि 01 दिसंबर है। आज हम आपको ऐसे मोक्षदा एकादशी के उपाय बताएँगे जो आपके जीवन की परेशानियां दूर करके आपके जीवन में खुशियां ले आएंगे। मोक्षदा एकादशी की तिथि 30 नवंबर को रात 09:29 पर शुरू होगी और 01 दिसंबर शाम 07:01 तक रहेगी । मोक्षदा एकादशी के दिन गीता जयंती भी मनाईजाती है। गीता जयंती के दिन ही भगवान श्री कृष्ण ने अर्जुन को श्रीमद्भगवद गीता का ज्ञान दिया था दिया था। इसे भी पढ़ें : आइए जाने मोक्षदा एकादशी के उपाय, जिन्हे करके आप जीवन में धन और सुख समृद्धि ... Read more - [मोक्षदा एकादशी का व्रत कैसे करें](https://hindumystery.com/mokshada-ekadashi-ka-vrat-kaise-kren/): मोक्षदा एकादशी ( Mokshada Ekadashi ) का व्रत मोक्षकारक होता है इसीलिए इस व्रत को अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। हम आपको बातएंगे कि मोक्षदा एकादशी का व्रत कैसे करें जिससे आप मोक्ष के भागी बनें और साथ ही आपके पितरों को भी मोक्ष की प्राप्ति हो, इससे प्रसन्न होकर आपके पितर भी आपको आशीर्वाद देंगे। इस व्रत से आपके वर्तमान जीवन में भी सुख-समृद्धि और खुशियां आ जाएँगी। अपनी इन्हीं सब खूबियों की वजह से मोक्षदा एकादशी का व्रत हिन्दू धर्म का एक महत्वपूर्ण व्रत है। मोक्षदा एकादशी का व्रत कैसे करें | Mokshada ekadashi ka vrat kaise kre मोक्षदा ... Read more - [मोक्षदा एकादशी क्या है](https://hindumystery.com/mokshada-ekadashi-kya-hai/): Mokshada Ekadashi: एकादशी व्रत के बारे में आमतौर पर सभी लोग जानते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं मोक्षदा एकादशी क्या है। आज इस लेख में हम आपको बताएँगे कि मोक्षदा एकादशी क्या है। साथ ही आप जानेंगे कि मोक्षदा एकादशी का महत्व क्या है। ऐसी कौन सी बातें हैं जो मोक्षदा एकादशी को इतना महत्वपूर्ण बना देती हैं। मोक्षदा एकादशी क्या है | Mokshada ekadashi kya hai मोक्षदा एकादशी हिंदू धर्म में एक महत्वपूर्ण व्रत है। मोक्षदा एकादशी का व्रत मार्गशीर्ष महीने के शुक्ल पक्ष की एकादशी को होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन व्रत करने से मोक्ष ... Read more - [Dhanu Sankranti : धनु संक्रांति के 10 चमत्कारी उपाय](https://hindumystery.com/dhanu-sankranti-10-upay/): इस संक्रांति पर हम आपको बताएँगे धनु संक्रांति के 10 चमत्कारी उपाय। ये उपाय आपके सभी तरह के कष्टों का हरण करेंगे। सूर्य के राशि परिवर्तन को संक्रांति कहते हैं। इस दिन सूर्य देव वृश्चिक राशि से निकलकर धनु राशि में प्रवेश करते हैं। इसीलिए इस दिन को धनु संक्रांति कहा जाता है। इस वर्ष की धनु संक्रांति 16 दिसंबर 2025 को है। इस संक्रांति पर करने के लिए हम आपको धनु संक्रांति के 10 चमत्कारी उपाय बताएँगे, जो आपके जीवन में आने वाली छोटी-बड़ी सभी समस्याओं को हल करेंगे इसे भी पढ़ें : धनु संक्रांति के 10 चमत्कारी उपाय | Dhanu ... Read more - [16 श्राद्ध का मतलब क्या होता है](https://hindumystery.com/16-shradh-ka-matlab-kya-hai/): 16 Shradh : श्राद्ध हिन्दू धर्म में पितरों के प्रति श्रद्धा और कृतज्ञता प्रकट करने तथा उन्हें याद करने के लिए किया जाने वाला एक कर्म है। श्राद्ध में पितरों का पिंडदान और तर्पण किया जाता है। पिंडदान मृतक के शरीर के लिए एक प्रतीकात्मक भोजन है, जबकि तर्पण मृतक की आत्मा को जल अर्पित करना है। 16 श्राद्ध का मतलब | 16 shradh ka matlab 16 श्राद्ध का मतलब है कि पितृपक्ष में 16 दिनों तक श्राद्ध किए जाते हैं। पितृपक्ष भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा से शुरू होता है और आश्विन मास की अमावस्या को समाप्त होता ... 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