भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी एक महत्वपूर्ण व्रत है जो भगवान गणेश को समर्पित है। यह त्यौहार हर महीने कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाया जाता है।

भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी 2025 तिथि
2025 में, भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी की तिथि 17 मार्च है।
भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी व्रत कथा | Bhalachandra Sankashti Chaturthi vrat katha
भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी व्रत कथा के अनुसार पुराने समय की बात है, एक गाँव में गरीब ब्राह्मण था। ब्राह्मण अपनी पत्नी और बच्चों के साथ गाँव में रहता था। वे लोग बहुत गरीब थे। कई बार ऐसा होता था की उन्हें भूखे रहकर ही दिन गुजरना पड़ता था। इन कष्ट भरे दिनों से छुटकारा पाने के लिए एक दिन, ब्राह्मण की पत्नी ने भगवान गणेश से प्रार्थना करी कि वह उन्हें भोजन और धन प्रदान करें।
भगवान गणेश ने ब्राह्मण की पत्नी की प्रार्थना सुनी और उसे भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी का व्रत रखने के लिए कहा । ब्राह्मण की पत्नी ने पूर्ण विधि-विधान के साथ भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी व्रत रखा और भगवान गणेश की पूजा की। भगवान गणेश उसके निष्कपट पूजा भाव और भक्ति से प्रसन्न हुए और उसे आजीवन धन और भोजन से संपन्न रहने का आशीर्वाद दिया। इस प्रकार इस व्रत का पालन करने से ब्राह्मण और उसकी पत्नी को उनके अति निर्धन और कष्टदायक जीवन से छुटकारा मिला।
इस कथा से हमें यह शिक्षा मिलती है की भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी का व्रत रखने और पूर्ण विधि के साथ भगवान गणेश की पूजा करने से गणपति प्रसन्न होते हैं और अपने भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं।
भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी व्रत कथा के समय निम्नलिखित बातों का ध्यान रखें :
- व्रत कथा का पाठ करते समय या फिर कथा सुनते समय ध्यान और एकाग्रता बनाए रखनी चाहिए।
- कथा सुनने के बाद भगवान गणेश की आरती अवशय करनी चाहिए।
व्रत सामग्री
- पूजा चौकी
- भगवान गणेश की प्रतिमा
- एक लौटा जल। इसमें थोड़ा गंगाजल मिला लें।
- फल
- फूल
- दूर्वा ( दूब एक तरह की घास )
- मोदक ( लड्डू )
भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी व्रत पूजा विधि | Bhalachandra Sankashti Chaturthi vrat puja vidhi
- सुबह जल्दी उठकर शौचादि से निवृत होकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें ।
- अपने घर के मंदिर या पूजा स्थल पर एक चौकी रखने के बाद उस पर भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित करें।
- इसके बाद लौटे में रखे जल से जल आचमन करें।
- गणेश जी को दूर्वा, फल, फूल, मोदक ( लड्डू ) अर्पित करें।
- गणेश चालीसा का पाठ करने के बाद “ॐ गं गणपतये नमः” मंत्र का जाप करें। भगवान् से अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति का निवेदन करें।
- इसके पश्चात आरती करें और प्रसाद वितरित करें।
रात्रि के समय चंद्रोदय के बाद चंद्रमा को अर्घ्य दें।
भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी व्रत भगवान गणेश की कृपा प्राप्त करने और अपने जीवन में सुख-समृद्धि लाने के लिए एक उत्तम व्रत है।
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