एकलव्य का अंगूठा व आज की धनुर्विद्या
गुरू द्रोणाचार्य शस्त्र विद्या में निपुण हस्तिनापुर के राजगुरू होने के साथ ही एक अजेय योद्धा भी थे । द्रोणाचार्य का यह अस्त्र कौशल सुनकर सहस्रों राजा और राजकुमार धनुर्वेद की शिक्षा लेने के लिये वहाँ एकत्रित हो गये। लेकिन क्योंकि वो एक राजगुरू थे अतः उन्होंने कौरव व पांडवों को छोड़कर अन्य सभी की … Read more