गाय के शरीर में कितने देवी-देवता का वास है

हिंदू धर्म में, गाय को पवित्र माना जाता है और उसे माता का दर्जा दिया जाता है। गाय को सभी देवी-देवताओं का निवास स्थान माना जाता है। अक्सर भक्तों के मन में यह सवाल उठता है कि गाय के शरीर में कितने देवी-देवता का वास है। चलिए आपकी जिज्ञासा शांत करते हैं और आपको बताते हैं कि गाय के शरीर में कितने देवी देवता का वास है।

गाय के शरीर में कितने देवी देवता का वास है

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गाय के शरीर में कितने देवी-देवता का वास है | gaay ke sharir me kitne devi devta ka vas hai

शास्त्रों के अनुसार, गाय के शरीर में 33 कोटि देवी-देवताओं का वास है अर्थात गाय के शरीर में 33 प्रकार के देवी-देवताओं का वास है। यहाँ पर 33 कोटि का अर्थ 33 करोड़ नहीं है, बल्कि 33 कोटि का अर्थ 33 प्रकार है। अर्थात गाय के शरीर में 33 करोड़ नहीं बल्कि 33 प्रकार के देवी देवताओं का वास होता है। ये 33 देवता इस प्रकार हैं – 8 वसु , 11 रूद्र , 12 आदित्य , 1 इंद्र और 1 प्रजापति। इसीलिए गाय की सेवा करना और उसकी पूजा करना बहुत ही पुण्य का कार्य माना जाता है।

Note: हिन्दू शास्त्रों में कोटि के दो अर्थ बताये गए हैं। ये दो अर्थ हैं कोटि=प्रकार ; कोटि=करोड़। गाय के विषय में बात करते समय कोटि शब्द का प्रयोग “करोड़” के लिए नहीं बल्कि “प्रकार” के लिए किया गया है।

गाय के किस अंग में कौन से देवता का वास है | gaay ke kis ang me kon se devta ka vas hai

  • गाय के सींगों में इंद्र का वास होता है।

  • गाय के मुख में चारों वेदों का वास होता है।

  • गाय के गोबर में लक्ष्मी का वास होता है।

  • गाय की पूँछ में हनुमान जी का वास होता है।

  • गाय के गोमूत्र में गंगा जी का वास होता है।

  • गाय के पैरों को धरती माँ का वास माना जाता है।

  • गाय की रंभाने की आवाज़ में प्रजापति का वास होता है।

  • गाय की पीठ पर कूबड़ को भगवान शिव से जोड़ा जाता है। इसे अक्षमता और पवित्रता की प्रतीक माना जाता है।

  • गाय के थनों में समुद्र का वास होता है।

  • गाय के कंधे में गरुड़ का वास होता है।

  • गाय के पेट में कालभैरव का वास होता है।

  • गाय के कानों में अश्विनी कुमार का वास होता है।

  • गाय की आंखों में सूर्य और चंद्रमा का वास होता है।

  • गाय की जीभ में माँ सरस्वती का वास होता है।

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गाय की पूजा क्यों करी जाती है | gaay ki puja kyu kari jati hai

हिंदू धर्म में, गाय को बहुत पवित्र माना गया है और उसे गौमाता का दर्जा दिया गया है। गाय को सभी देवी-देवताओं का निवास स्थान माना जाता है।

शास्त्रों के अनुसार, गाय के शरीर में 33 कोटि देवी-देवताओं का वास है। गाय के शरीर के विभिन्न अंगों में अलग-अलग देवी-देवताओं का वास माना जाता है। इसीलिए हिन्दू धर्म में गाय की पूजा का विधान है। गाय की पूजा करने से मनुष्य को सभी देवी-देवताओं का आशीर्वाद प्राप्त होता है और सुख-समृद्धि तथा मोक्ष की प्राप्ति होती है। गौ पूजन से मनुष्य के पापों का भी नाश होता है।

गाय की पूजा कब होती है | gaay ki puja kab hoti hai

गाय को हिन्दू धर्म में बहुत ही पवित्र माना गया है। सनातन धर्म में आस्था रखने वाले व्यक्ति के जीवन में कई अवसर आते हैं जब उसे गाय की पूजा करने का सौभाग्य प्राप्त होता है। गाय की पूजा कई अवसरों पर की जाती है।

  • दीपावली: भविष्य पुराण के अनुसार गाय को लक्ष्मी का रूप माना जाता है इसीलिए दीपावली के दिन गाय की पूजा की जाती है।

  • गोपाष्टमी: कार्तिक शुक्ल की अष्टमी तिथि को गोपाष्टमी का त्योहार मनाया जाता है। इस दिन गाय की विशेष पूजा की जाती है।

  • गणेश चतुर्थी: गणेश चतुर्थी के दिन जिस गुड़ और देसी घी का भोग लगाया गया होता है उस गुड़ और घी को सफाई पूर्वक तैयार की गयी रोटी पर रख कर गोमाता को खिलाया जाता है और उन्हें प्रणाम किया जाता है।

  • इन सबके अलावा हिन्दू धर्म में  विशेष अवसरों पर भी गाय की पूजा की जाती है।

  • हिन्दू शास्त्रों में गोदान का वशेष महत्व बताया गया है। शास्त्रों में बताया गया है कि व्यक्ति को जीवन में एक बार गाय का दान अवशय करना चाहिए।

गाय की पूजा कैसे की जाती है | gaay ki puja kaise ki jati hai

गाय की पूजा करने के लिए कोई निश्चित नियम नहीं हैं।आमतौर पर गाय की पूजा गाय को स्नानादि कराने के बाद तिलक लगाकर और आरती उतारकर करि जाती है।

गाय की पूजा विधि | gaay ki puja vidhi

  • गाय की पूजा करने के लिए सबसे पहले गाय को स्नान कराया जाता है। गाय को साफ पानी से अच्छी तरह से साफ़ किया जाता है।

  • इसके बाद गाय के माथे पर कुमकुम या फिर हल्दी का तिलक लगाया जाता है।

  • फिर गाय को फूलों की माला पहनाई जाती है।

  • इसके बाद गाय की विधिवत पूजा की जाती है। पूजा में गाय को फूल, फल, मिठाई आदि अर्पित किए जाते हैं।

  • अंत में गाय की आरती उतारी जाती है और फिर गाय को भोजन कराया जाता है।

गाय की पूजा करने से क्या लाभ होता है | gaay ki puja karne se kya labh hota hai

गाय को हिंदू धर्म में एक पवित्र और पूजनीय प्राणी माना जाता है। गाय की पूजा करने से मनुष्य को कई प्रकार के लाभ होते है।

गाय की पूजा करने के लाभ:

  • गाय की पूजा करने से मनुष्य को देवी-देवताओं का आशीर्वाद प्राप्त होता है। गाय को देवी-देवताओं का निवास स्थान माना जाता है। गाय की पूजा करने से सभी देवी-देवता प्रसन्न होते हैं और हमे सभी देवी-देवताओं का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

  • गौ-पूजन करने से मनुष्य के पापों का नाश होता है और उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है।

  • गाय की पूजा करने से मनुष्य के जीवन में शांति और सुख-समृद्धि आती है।

  • गो-पूजा और गाय की सेवा करने से मनुष्य में दया और करुणा का भाव बढ़ता है।

गाय की पूजा हिंदू धर्म में एक महत्वपूर्ण प्रथा है।

वेदों में गाय का महत्व | vedo me gaay ka mahatv

वेदों में गाय को एक पवित्र और पूजनीय प्राणी माना गया है। वेदों में गाय को “गौमाता” कहा गया है। वेद में कहा गया है कि गाय की सेवा करना और उसकी पूजा करना बहुत ही पुण्य का कार्य है। गाय की सेवा से सभी देवी-देवता प्रसन्न होते हैं और मनुष्य को सुख-समृद्धि और मोक्ष की प्राप्ति होती है।

अथर्ववेद में गाय के बारे में कहा गया है कि “गौओं के दूध से निर्बल मनुष्य हष्ट-पुष्ट और बलवान होता है तथा निस्तेज मनुष्य तेजस्वी बनता है। गौओं से घर की शोभा बढ़ती है। गौओं का शब्द बहुत प्यारा लगता है।”

ऋग्वेद में गाय के लिए “अघन्या” शब्द का प्रयोग किया गया है। अघन्या शब्द का अर्थ है जो किसी भी परिस्थिति में मारने योग्य नहीं है। अर्थात ऋग्वेद में गाय को नहीं मारने का निर्देश दिया गया है ‘

गाय को हिंदू धर्म में बहुत ही महत्वपूर्ण माना जाता है। वेदों में गाय के महत्व को बहुत ही विस्तार से बताया गया है। वेदों में गाय को पूजनीय माना गया है। क्यूंकि यह रूद्रदेवों की माता, वसुदेवों की कन्या आदित्य देवों की बहन है।

गीता में गाय के बारे में क्या लिखा है | geeta me gaay ke bare me kya likha hai

गीता में गौमाता को एक पवित्रतम प्राणी कहा गया है। गीता में गौ माता के योगदान के बारे में बताया गया है। उससे हमें दूध, घी, गोमूत्र जैसे उत्पाद प्राप्त होते हैं। ये पदार्थ सम्पूर्ण मानव जाती के लिए अति उपयोगी होते हैं।

गीता में गोमाता को उच्च स्थान दिया गया है। उसे देवताओं और ऋषि-मुनियों के सामान माना गया है। यहाँ हमें गौ माता के पूजन का भी उल्लेख मिलता है। गौ पूजन से व्यक्ति को मन में आनंद और शांति की प्राप्ति होती है।

गीता में गौ माता के संरक्षण के बारे में भी बताया गया है। गौ माता को संरक्षित रखना धार्मिक कर्तव्य बताया गया है। गाय को स्वर्ग का द्वार माना गया है। गाय की पूजा और सेवा से व्यक्ति को स्वर्ग की प्राप्ति हो सकती है।

कृष्ण को गाय क्यों पसंद है | krishna ko gaay kyu pasand hai

भगवान कृष्ण को गाय बहुत पसंद है। कान्हा अक्सर गायों के साथ खेलते और उनके साथ घूमते देखे जाते थे। कृष्ण को गाय इसलिए पसंद है क्योंकि:

  • गाय को देवी-देवताओं का निवास स्थान माना जाता है। कृष्ण स्वयं भगवान हैं और उन्हें सभी देवी-देवताओं से प्रेम है। इसलिए, उन्हें गाय भी बहुत पसंद है।

  • गाय मनुष्य के लिए बहुत ही उपयोगी प्राणी है। गाय का दूध, गोबर और मूत्र मनुष्य के लिए बहुत ही उपयोगी हैं। कृष्ण को सभी प्राणियों से प्रेम है और वे चाहते हैं कि सभी प्राणियों को सुख और समृद्धि प्राप्त हो। इसलिए, वे गाय की सेवा करना और उसकी पूजा करना पसंद करते हैं।

  • गाय को शांत और दयालु प्राणी माना जाता है। गाय हमेशा शांत रहती है। इसीलिए भगवान् कृष्ण को गाय इतनी अधिक प्रिय है।

कृष्ण ने अपने बचपन में गायों के साथ कई लीलाएं की थीं। भगवान् कृष्ण की अपने बाल्य काल में की गयीं लीलाएं गायों के बिना अधूरी हैं कृष्ण ने अपने जीवन में गाय की सेवा और उसकी पूजा का बहुत महत्व दिया। उन्होंने अपने भक्तों को भी गाय की सेवा और उसकी पूजा करने के लिए प्रेरित किया। इसीलिए हिंदू धर्म में गाय को बहुत ही पवित्र और पूजनीय प्राणी माना गया है।

घर में गाय की मूर्ति रखने से क्या होता है | ghar me gaay ki murti rakhne se kya hota hai

सनातन धर्म में गाय को समृद्धि, सौभाग्य, और सुख-शांति का प्रतीक माना जाता है। गाय को माता का दर्जा दिया जाता है। हिन्दू धर्म में गाय को भगवान् के समान पूजनीय माना जाता है।

घर में गाय की मूर्ति रखने से कई तरह के लाभ होते हैं, जिनमें से कुछ निम्नलिखित हैं:

  • नकारात्मक ऊर्जा से बचाव:घर में गाय की मूर्ति रखने से घर से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और घर में सकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव बढ़ता है।

  • आर्थिक समस्याएं दूर होती हैं: गाय को धन और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। घर में गाय की मूर्ति रखने से आर्थिक समस्याएं दूर होती हैं और धन की वृद्धि होती है।

  • संतान प्राप्ति: अपने बछड़े को दूध पिलाती गाय की मूर्ति घर में रखने से संतान प्राप्ति में सहायता मिलती है। ऐसी भी मान्यता है कि संतान सुख की इच्छा रखने वाली महिलाओं को कामधेनु गाय और उसके बछड़े की मूर्ति की पूजा करनी चाहिए।

  • सुख-शांति और समृद्धि: घर में सुख-शांति और समृद्धि आती है। गाय को समृद्धि और सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है। घर में गाय की मूर्ति रखने से घर में सुख-शांति और समृद्धि आती है।

  • मानसिक शांति मिलती है: घर में गाय की मूर्ति रखने से घर का वातावरण शांत होता है। गाय को शांति का प्रतीक माना जाता है। घर में गाय की मूर्ति रखने से मानसिक शांति मिलती है

वास्तु शास्त्र के अनुसार, घर में गाय की मूर्ति को ईशान कोण या पूर्वोत्तर दिशा में रखना चाहिए। इस दिशा को सबसे अच्छा माना गया है क्यूंकि इस दिशा में देवी देवताओं का वास होता है। गाय की मूर्ति को हमेशा साफ-सुथरा रखना चाहिए और उसकी नियमित रूप से पूजा-अर्चना करनी चाहिए।

यदि आप अपने घर में सुख-शांति, समृद्धि, और सौभाग्य चाहते हैं, तो आप भी अपने घर में गाय की मूर्ति रख सकते हैं।

गाय को पवित्र क्यों माना जाता है | gaay ko pavitra kyu mana jata hai

गाय को पवित्र माने जाने के कई कारण हैं। यहाँ कई धार्मिक और सांस्कृतिक प्रथाएं हैं जिनमे गाय को पवित्रता का सूचक माना जाता है।

यहां कुछ मुख्य कारण हैं जिनके कारण गाय को हिन्दू धर्म में पवित्र माना जाता है:

  • धार्मिक महत्व: गाय को भगवान का अवतार माना जाता है। हिंदू मान्यताओं के अनुसार, गाय में देवी-देवताओं का वास होता है। गाय भगवान कृष्ण को भी प्रिय है। इसीलिए गाय को पवित्र माना जाता है और उसकी पूजा भी की जाती है।

  • मातृत्व का प्रतीक: गाय को मातृत्व का प्रतीक माना जाता है। गाय दूध प्रदान करती है और गाय के दूध को बालक के पोषण और विकास के लिए श्रेष्ठ माना जाता है।

गाय को पवित्र माना जाने के कारण उसकी पूजा की जाती है। कामधेनु गाय को विशेष रूप से पवित्र माना जाता है। कामधेनु गाय को सभी इच्छाओं को पूर्ण करने वाली गाय माना जाता है। गाय को जीवनदायिनी और शांति का प्रतीक माना जाता है।

गाय के पैर छूने से क्या लाभ होता है | gay ke pair chune se kya hota hai

ब्रह्मवैवर्तपुराण के अनुसार गाय के पैरों में सभी तीर्थ होते हैं। गौ माता के शरीर में देवताओं का निवास है। मान्यता हैं कि जो भी व्यक्ति गौ माता के पैरों में लगी मिट्टी का नियमित तिलक लगाता है, उसे किसी भी तीर्थ में जाने की आवश्यकता नहीं पड़ती है। उसे सभी तीर्थों का फल उसी समय प्राप्त हो जाता है।

गाय के पैर छूने से निम्नलिखित लाभ होते हैं:

  • पुण्य प्राप्ति: गाय के पैर छूने से पुण्य की प्राप्ति होती है। गाय को पवित्र माना जाता है, इसलिए उसके पैर छूने से पुण्य प्राप्त होता है।

  • मानसिक शांति: गाय का रूप देखने से मन को शांति मिलती है। गाय के पैर छूने से मन को और भी अधिक शांति मिलती है।

  • सकारात्मक ऊर्जा की प्राप्ति: गौ माता पवित्र और सकारात्मक ऊर्जा से भरपूर हैं। गाय के पैर छूने से सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है।

गाय के पैर छूने से कई तरह के लाभ होते हैं। यदि आपके घर में है और आप अपने जीवन में सुख-शांति, समृद्धि, और सौभाग्य चाहते हैं, तो आपको गाय के पैर छूने चाहिए।

( नोट: यदि आपके घर में गाय नहीं है तो सड़क पर चलते हुए किसी भी गाय के पैर छूने से आपको चोट लगने का खतरा हो सकता है। )

चांदी की गाय दान करने से क्या होता है | chandi ki gaay dan karne se kya hota hai

चांदी की गाय दान करने का कोई विशेष धार्मिक या आध्यात्मिक लाभ होता है, इसका वेदों में या हिन्दू धर्म के प्रमुख ग्रंथों में कोई उल्लेख नहीं नहीं मिलता है। किन्तु हिंदी समाज में चांदी की गाय दान करने की परंपरा लम्बे समय से चली आ रही है।

परम्पराओं के अनुसार चांदी की गाय दान करने से कई प्रकार के लाभ होते हैं, जो इस प्रकार हैं:

  • सूर्य के कमजोर होने और शुभ फल प्राप्ति के लिए गौदान करना चाहिए। यदि किसी भी कारण से ऐसा करना संभव न हो तो, गौ दान के रूप में चांदी के गाय-बछिया की जोड़ी भी दान कर सकते है।

  • गाय को समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। चांदी की गाय दान करने से धन और समृद्धि में वृद्धि होती है।

  • चांदी की गाय दान करने से बुरी आत्माओं से हमारी रक्षा होती है।

हिन्दू परंपरा में कुछ विशेष अवसरों पर चांदी की गाय दान करना शुभ माना जाता है | chandi ki gaay daan karna shubh hota hai

  • पितृ पक्ष के दौरान।
  • नवरात्रि के दौरान।
  • दीपावली के दौरान।
  • गायत्री जयंती पर।

चांदी की गाय दान करते समय कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए:

  • चांदी की गाय को एक योग्य व्यक्ति को दान करना चाहिए।

  • चांदी की गाय को दान करने के बाद गाय की पूजा करनी चाहिए।

  • चांदी की गाय को विधि-विधान से दान करना चाहिए।

श्राद्ध में गाय को क्या खिलाना चाहिए | shradh me gaay ko kya khilana chahiye

पितृपक्ष में अपने पितरों को तृप्त करने के लिए हम नीचे दिए गए तरीकों से गाय की सेवा कर सकते हैं:

  • श्राद्ध में गाय को हरा चारा जैसे कि, घास, ज्वार, बाजरा, मक्का आदि खिलाना चाहिए।

  • गाय को ताज़ा और साफ़ पानी पिलाना चाहिए।

शाश्त्रो में हमें यह भी बताया गया है की यदि कोई व्यक्ति अति निर्धन होने के कारण या फिर अन्य किसी भी कारण से पितृपक्ष में अपने पूर्वजों का पिंडदान या श्राद्ध-कर्म करने में असमर्थ है, यो उसे पुरे श्रद्धा भाव से गाय को घास खिलानी चाहिए और गाय के समक्ष हाथ जोड़कर अपने पितरों की शान्ति के लिए प्रार्थना करनी चाहिए। ऐसा करने से श्राद्धकर्म पूरा होता है और पितर भी तृप्त होते हैं। 

यहाँ ध्यान देने वाली बात यह है कि गाय को घास खिलाकर पितरों का श्राद्ध करने पर श्राद्धकर्म तभी पूरा होगा जब आपके पास वास्तव में पितरों का श्राद्ध करने के लिए धन नहीं होगा या फिर अन्य किसी कारण से आप सक्षम नहीं होंगे।

यदि कोई व्यक्ति पैसा बचाने के लिए ऐसा करता है तो गाय को घास खिलाकर किया गया श्राद्धकर्म स्वीकार्य नहीं होगा, और उसके पितरों को तृप्ति नहीं मिलेगी।

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गाय को लक्ष्मी क्यों कहा जाता है | gaay ko lakshami kyu kaha jata hai

गाय को लक्ष्मी कहा जाता है इसके एक पीछे धार्मिक कारण यह है कि, हिंदू मान्यताओं के अनुसार, गाय में देवी लक्ष्मी का वास होता है। और साथ ही गाय दूध, दही, घी, और गोबर जैसे कई उत्पाद देती है, जो मानव जीवन के लिए आवश्यक हैं। इन उत्पादों का उपयोग भोजन, औषधि, और अन्य कार्यों में किया जाता है।

गाय को लक्ष्मी की तरह संबोधित करने का मुख्य कारण उसके दूध का महत्व है, जो जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा है और लाभकारी होता है। भारतीय संस्कृति में दूध को आर्थिक सुख का प्रतीक माना जाता है, और गृहस्थों के लिए आर्थिक स्थिरता का स्रोत भी।

इसके साथ ही गाय को शांति, अहिंसा और प्रकृति की संरक्षिका के रूप में भी देखा जाता है, जो लक्ष्मी देवी के आराधना में महत्वपूर्ण हैं।

हिन्दू धर्म में गाय को माता क्यों मानते हैं | hindu dharm me gaay ko mata kyu mante hai

भारतीय संस्कृति में गाय प्राचीनकाल से ही दूध का मुख्य स्रोत होती है, और दूध शिशुओं के पोषण के लिए बहुत महत्वपूर्ण होता है। गाय के दूध का उपयोग गृहस्थों के दैनिक जीवन में भी होता है। इसलिए गाय को माता के रूप में माना जाता है, क्योंकि मां ही अपने बच्चों को दूध प्रदान करती हैं।

निम्नलिखित कारणों की वजह से हिन्दू धर्म में गाय को माता मानते हैं:

  • गाय दूध देती है, जो जीवन का आधार है। दूध को भगवान कृष्ण का प्रसाद माना जाता है।

  • गाय के गोबर से बनी धूप और अगरबत्ती का उपयोग पूजा-पाठ में किया जाता है।

  • गाय को भगवान कृष्ण की सवारी माना जाता है। कृष्ण को भगवान विष्णु का अवतार हैं, जो संसार के पालनहार हैं।

  • गाय के गोबर का उपयोग खेतों की खाद के रूप में किया जाता है, जिससे फसलों की पैदावार बढ़ती है।

इसके अलावा, गाय को भारतीय सांस्कृतिक परंपरा में मानवता, और प्राकृतिक संरक्षण के प्रतीक के रूप में माना जाता है। इसी कारण हिन्दू धर्म में गाय को माता के रूप में माना जाता है।

गाय किसका प्रतीक है | gaay kiska pratik hai

हिन्दू धर्म में गाय को निम्नलिखित चीजों का प्रतीक माना जाता है:

  • सनातन धर्म में गाय को समृद्धि और सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है।

  • हिन्दू धर्म में गाय को माता माना जाता है, जो मातृत्व का प्रतीक है।

  • गाय एक दयालु प्राणी है, जो दया का प्रतीक है।

इसके साथ ही गाय को हिन्दू संस्कृति में सामाजिक समृद्धि और धार्मिकता के प्रतीक के रूप में भी माना जाता है।

गाय की पूजा क्यों की जाती है भैंस की नहीं | gaay ki puja kyu ki jaati bhains ki nhi

ऐसे बहुत से कारण हैं जिनकी वजह से हिन्दू धर्म में गाय की पूजा की जाती है लेकिन भैंस की नहीं। उनमे से कुछ कारण नीचे दिए गए हैं:

  • पौराणिक कथाएँ: हिन्दू धर्म में गाय को देवी-देवताओं के साथ जोड़ने वाली कई पौराणिक कथाएँ हैं। एक कथा के अनुसार कामधेनु गाय समुद्र मंथन के दौरान निकले 14 बहुमूल्य रत्नों में एक है। भैंस की उत्पत्ति से जुडी ऐसी कोई भी पौराणिक कथा हिन्दू शास्त्रों में नहीं मिलती।

  • भगवान् कृष्ण से सम्बन्ध: हिंदू मान्यताओं के अनुसार, गाय में देवी-देवताओं का वास होता है। गाय को भगवान कृष्ण की भी सवारी माना जाता है। इसलिए भी गाय को पूजनीय माना गया है जबकि भैंस के सम्बन्ध में शास्त्रों में ऐसा कोई भी उल्लेख नहीं मिलता है जिससे उसे पूजनीय माना जाये।

  • वास्तु शास्त्र में उल्लेख: वास्तु शास्त्र में कामधेनु गाय को धन और सुख-समृद्धि के लिए महत्वपूर्ण बताया गया है। किन्तु वास्तु शास्त्र में भैंस के ऐसा कुछ भी नहीं कहा गया है।

  • उपयोगिता: मानव जाती के लिए गाय के दूध, गोबर और गोमूत्र की उपयोगिता बहुत अधिक है। गाय का दूध बच्चों के पालन पोषण के लिए अधिक उपयोगी है। वहीं गोमूत्र और गोबर से औषधियों और खेतों के लिए खाद का निर्माण होता है। दूसरी तरफ भैंस से प्राप्त होने वाला दूध,गोबर और मूत्र तुलनात्मक रूप से काम उपयोगी होता है।

FAQ – Frequently Asked Questions

गाय की पूँछ में किसका वास है ?

गाय की पूँछ में पवन पुत्र हनुमान जी का वास होता है।

गाय पर हाथ फेरने से क्या होता है ?

गाय के शरीर पर एक उभरा हुआ कूबड़ होता है। इस कूबड़ में सूर्य केतु नाड़ी होती है। इसीलिए गाय पर हाथ फेरने से शरीर के रोगों का नाश होता है।

रविवार के दिन गाय को क्या खिलाना चाहिए ?

वास्तु शास्त्र के अनुसार रविवार के दिन गाय को रोटी खिलानी चाहिए। रविवार का दिन सूर्यदेव को समर्पित है। यदि किसी की कुंडली में सूर्य से जुड़ा कोई दोष है तो गाय को रोटी खिलाने से वह दोष दूर हो जाता है।

गाय की सेवा क्यों करनी चाहिए ?

गाय के शरीर में देवी-देवताओं का वास होता है। गाय की सेवा करने से देवी-देवता प्रसन्न होते हैं और गाय की सेवा करने से पुण्य प्राप्त होता है। इसीलिए गाय की सेवा करनी चाहिए।

गाय के हाथ चाटने से क्या होता है ?

गाय के हाथ चाटने से व्यक्ति का सोया भाग्य जाग जाता है। ऐसी मान्यता है कि जिस व्यक्ति का भाग्य साथ नहीं देता उसे अपने हाथ पर गुड़ रखकर गाय को खिलाना चाहिए। ऐसा करने से गाय उसकी हथेली चाटेगी और ऐसा होने से भाग्य सुधर जाएगा।

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