अनाहत चक्र मानव शरीर के प्रमुख सात चक्रों में से एक है। आज इस लेख में हम आपको बताएँगे कि अनाहत चक्र कैसे जागृत करें, anahata chakra kaise jagrit kare. साथ ही इस लेख से आप अनाहत चक्र के फायदे भी जानेंगे।अनाहत चक्र को हृदय चक्र भी कहा जाता है। अनाहत चक्र का प्रतीक पशु हिरण है। अनाहत चक्र का रंग हरा होता है और इस चक्र का तत्व वायु है।

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अनाहत चक्र हमारे शरीर के सातों चक्रों की पंक्ति के मध्य में स्थित चक्र होता है। यह हमारे आस पास प्रेम, करुणा, आनंद की भावनाओं को जगाने में मदद करता है।
अनाहत चक्र कैसे जागृत करें
अनाहत चक्र (Heart Chakra) हृदय के स्थान पर स्थित होता है। इसे प्रेम, करुणा, और संतुलन का केंद्र माना जाता है। हिन्दू धर्म के प्राचीन ग्रंथों में अनाहत चक्र को जागृत करने के लिए विभिन्न आध्यात्मिक और शारीरिक विधियाँ बताई गयी हैं। जिनसे आप अपने Heart Chakra को जागृत कर सकते हैं।
अनाहत चक्र (ह्रदय चक्र) जागृत करने के लिए संध्या काल के समय में किसी समतल स्थान पर अनाहत चक्र के आसन लगा कर बैठ जाएँ। इसके लिए आपको सुखासन, सिद्धासन जो भी आसन अपने अनुकूल लगे उसमे बैठ जाएँ। इसके बाद अनाहत चक्र मंत्र [ यं ] का उच्चारण करें। ऐसा नियमित रूप से करने पर अनाहत चक्र जागृत हो जायेगा।
अनाहत चक्र मंत्र ।। यं ।। का उच्चारण इस प्रकार होता है – यम्म्म। साधना के समय हृदय क्षेत्र पर ध्यान केंद्रित करते हुए ।। यं ।। मंत्र का जाप करना चाहिए। क्यूंकि अनाहत चक्र हमारे इसी क्षेत्र में स्थित होता है। वैसे तो आप ह्रदय चक्र जागरण की ये साधना कभी भी कर सकते हैं किन्तु संध्या काल इसके लिए सबसे अच्छा समय रहेगा। क्यूंकि हिन्दू धर्म शाश्त्रो में संध्या काल को पूजा – उपासना और ध्यान के लिए उत्तम समय माना गया है।
संध्या काल का समय प्रतिदिन सुबह सूर्योदय के 20 मिनट पहले से सूर्योदय के 20 मिनट बाद तक होता है, इसी प्रकार शाम के समय सूर्यास्त के 20 मिनट पहले से लेकर सूर्यास्त के 20 मिनट बाद तक का समय संध्या काल का समय होता है।
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इसके साथ ही और भी कई ऐसे कार्य है जो आपके ह्रदय चक्र ( Heart Chakra ) जागरण में आपके लिए सहायक होंगे।
ह्रदय पर संयम रखना अनाहत चक्र को सक्रीय करने में सहायक होता है।
अनाहत चक्र का तत्व वायु है इसीलिए प्राणायाम का अभ्यास इस कार्य में आपका सहायक होगा। प्राणायाम के द्वारा अंदर जाती श्वास के साथ आपके चक्र को ताकत मिलेगी और वह सक्रिय होना शुरू हो जायेगा।
अपने अंदर के अहंकार को समाप्त करें और मन में प्रेम भाव को विकसित कीजिये
भुजंगासन , चक्रासन और धनुरासन योग अभ्यास करते समय भी अनाहत चक्र मंत्र का जाप किया जा सकता है जो आपकी चक्र जागरण साधना में सहायक होता है
यदि आप ह्रदय चक्र को जागृत करने के लिए प्रयासरत हैं तो किसी के भी प्रति द्वेष और ईर्ष्या की भावना न रखें। यह भाव ह्रदय चक्र जाग्रति के मार्ग में बाधक होता है।
अनाहत चक्र जागरण के लक्षण | anahata chakra jagrit hone ke lakshan
जब व्यक्ति का अनाहत चक्र सक्रीय होने लगता है तो उसमें कुछ इस तरह अनाहत चक्र जागरण के लक्षण दिखाई पड़ते हैं।
व्यक्ति को अपने भीतर प्रेम और करुणा अनुभव होने लगती है। व्यक्ति स्वयं में अधिक सृजनशीलता महसूस करने लगता है। उसे लेखक, कवि, चित्रकार जैसे पेशों की तरफ आकर्षण अनुभव होने लगता है। व्यक्ति को स्वयं के दयालु होने का आभास होने लगता है। ये अनाहत चक्र जागरण के लक्षण हैं जो चक्र जागरण के समय व्यक्ति को अनुभव होते हैं।
क्यूंकि ह्रदय चक्र का सम्बन्ध प्रेम से होता है। इसीलिए साधक को प्रेम और करुणा के लक्षण भी अनुभव होते हैं। व्यक्ति स्वयं में पहले के मुक़ाबले अधिक व्यवहार कुशलता भी अनुभव करने लगता है।
Note: ये लक्षण दो अलग-अलग व्यक्तियों में भिन्न भी हो सकते हैं और यह भी आवश्यक नहीं कि चक्र जागरण की स्थिति में सभी लक्षण एक साथ दिखाई देंगे।
अनाहत चक्र के फायदे | anahata chakra ke fayede
अनाहत चक्र शरीर में प्रेम, करुणा, संतुलन और भावनात्मक शांति का केंद्र है। इस चक्र को जागृत और संतुलित करने से कई शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक लाभ प्राप्त हो सकते हैं। यहां अनाहत चक्र के लाभ विस्तारपूर्वक बताये गए हैं।
1. प्रेम और करुणा में वृद्धि – अनाहत चक्र जागृत होने पर सभी जीवों के प्रति गहरा प्रेम और करुणा का अनुभव होने लगता है।
2. संबंधों में सुधार -व्यक्ति के व्यक्तिगत और सामाजिक संबंधों में सुधार होता है। व्यक्ति अपने आसपास के लोगों के साथ गहरे और अधिक सार्थक संबंध स्थापित करने में सक्षम हो जाता है।
3. भावनात्मक संतुलन – चक्र जागरण होने पर व्यक्ति स्वयं को भावनात्मक रूप से संतुलित महसूस करने लगता है।
4. सहजता और क्षमा का विकास – इस चक्र जागरण के पश्चात व्यक्ति दूसरों की गलतियों को आसानी से क्षमा कर देता है।
5. शारीरिक स्वास्थ्य में सुधार – हृदय चक्र के जागरण और संतुलन से हृदय की सेहत भी बेहतर होती है।
6. शांति और खुशी – मन में शांति और स्थिरता का अनुभव होता है। हृदय चक्र जागृत होने पर व्यक्ति को छोटी-छोटी बातों में भी खुशी मिलने लगती है।
7. सृजनात्मकता में वृद्धि – अनाहत चक्र जागृत होने पर व्यक्ति की कला, संगीत या अन्य रचनात्मक गतिविधियों में रुचि बढ़ जाती है। वह हर क्षण कुछ न कुछ नया रचने की कल्पना करने लगता है उसकी सृजनात्मकता में वृद्धि हो जाती है ।
9. आध्यात्मिक अनुभव – व्यक्ति को आध्यात्मिक अनुभव भी हो सकते हैं, जैसे कि दिव्य प्रकाश देखना या देवत्व का अनुभव करना।
10. तनाव और चिंता में कमी – अनाहत चक्र जागरण के पश्चात आप स्वयं तनाव और चिंता से मुक्त महसूस करते हैं।
11. आत्मविश्वास में वृद्धि – व्यक्ति अपने आप में अधिक आश्वस्त महसूस करता है उसमे आत्मविश्वास की वृद्धि हो जाती है।
12. सहानुभूति और समझ -इस चक्र के जागृत होने से व्यक्ति में दूसरों की भावनाओं को बेहतर ढंग से समझने और सहानुभूति दिखाने की क्षमता बढ़ जाती है।
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