क्या स्वप्नदोष से ब्रह्मचर्य भंग हो जाता है | जानिये ब्रह्मचर्य से जुड़े सभी प्रश्नों के उत्तर

हिन्दू धर्म में ब्रह्मचर्य को एक तपस्या कहा गया है। बताया गया है की यदि आप ब्रह्मचर्य की जीवन शैली का पालन करते हुए ईश्वर की भक्ति करते हैं तो आपका मन पवित्र हो जाता है और आपको परमानन्द की प्राप्ति होती है।

क्या स्वप्नदोष से ब्रह्मचर्य भंग हो जाता है
ब्रह्मचर्य का यदि शाब्दिक अर्थ देखा जाये तो :
ब्रह्म अर्थात - जो अनंत, अनादि, परमसत्य और परमेश्वर है। 
चर्य अर्थात - आचरण करना। 

वो सभी प्रकार के आचरण जो हमें ब्रह्म की और ले जाते हैं। परम सत्य, परमेश्वर की ओर ले जाते है। वो सभी ब्रह्मचर्य ही कहलाते हैं।  

क्या स्वप्न दोष से ब्रह्मचर्य भंग हो जाता है

ब्रह्मचर्य केवल एक शारीरिक क्रिया नहीं है इसमें अपने मन के भावों, विचारों पर भी नियंत्रण किया जाता है। अपनी शारीरिक क्रियाओं पर नियंत्रण रखना इसका केवल एक भाग होता है। यदि हम अपनी दिनचर्या का पालन कर रहे हैं और मन के भावों पर पर नियंत्रण है। उस स्थिति में यदि स्वप्नदोष हो जाता है तो स्वप्नदोष से ब्रह्मचर्य भंग नहीं होता।

यह एक शारीरिक समस्या है इससे निपटने के लिए आप चिकित्सकीय परामर्श ले सकते हैं। ब्रह्मचर्य की साधना को केवल मात्र शरीर तक सीमित रखना ठीक नहीं है। ब्रह्मचर्य इससे कहीं अधिक विस्तारित होता है। इस लेख में हम आपके ब्रह्मचर्य से जुड़े सभी प्रश्नों का समाधान करेंगे।

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ब्रह्मचर्य का सही मतलब क्या है

आज के समय में जब भी हम जानना चाहते हैं कि ब्रह्मचर्य का सही के अर्थ क्या है तो हमे इसका एक ही जवाब मिलता है कि महिलाओं से दूरी और वीर्य रक्षण ही ब्रह्मचर्य है। परन्तु वास्तव में ब्रह्मचर्य का वास्तविक अर्थ इससे कहीं अधिक बड़ा है।

अपनी सभी इन्द्रियों पे संयम रखना। कोई भी कार्य करते समय अगर हमारी सभी इन्द्रियां उत्तेजित हो जाती हैं और हमारे काबू से बाहर हो जाती हैं तो ऐसे कार्यों को होने से रोकना ही ब्रह्मचर्य का सही मतलब है।

ऐसे कार्यों कि सूची में योन क्रीड़ा सबसे प्रमुख कार्य है जिसमे हमारा अपनी इन्द्रियों पे वश नहीं रह जाता इसीलिए समाज में यह धारणा बनी हुई है कि शारीरिक समबन्धों से दूरी बनाये रखना ही ब्रह्मचर्य का नियम है।

छान्दोग्योपनिषद में बताया गया है कि ब्रह्मचर्य का पालन करते समय हमें इन्द्रियों से मिलने वाले बाहरी सुखों से दूर रहना चाहिए जैसे – सिनेमा देखना,यौन सुख आदि । सिनेमा देखते समय हम अपनी इन्द्रियों आँख और कान की सहायता से देखते, सुनते हैं और इंजॉय करते हैं। इसी प्रकार यौन सुख में भी हम अपनी इन्द्रियों के माध्यम से सुख प्राप्त करते हैं।

केवल मात्र स्त्री पुरुषों का एक दूसरे से दूर रहना ही ब्रह्मचर्य नहीं है है

किन वजहों से हमारा ब्रह्मचर्य भंग होता है

ब्रह्मचर्य भंग होने के भी कुछ कारण होते हैं जो नीचे दिए गए हैं –

  • कामुकता और संभोग की इच्छाओं को नियंत्रित न कर पाना हमारे ब्रह्मचर्य के टूटने की मुख्य वजह बनता है।
  • यदि ब्रह्मचर्य का पालन करने वाला व्यक्तिअपने मन में किसी दूसरे के प्रति अपवित्र विचार और कपटी मनोभाव रखता है तो इससे उसका ब्रह्मचर्य भंग होता है।
  • यदि कोई ब्रह्मचर्य का पालन करते समय अनुचित हिंसा करता है तो इससे उसका ब्रह्मचर्य भंग होता है। हिन्दू शास्त्रों में एक ब्रह्मचारी का सबसे पहला कर्म अहिंसा होता है। किन्तु यदि किसी निर्बल मनुष्य या फिर किसी जीव- जंतु पर कोई अत्याचार हो रहा है और उनकी रक्षा के लिए हिंसा करनी पड़े तो इससे ब्रह्मचर्य भंग नहीं होता क्यूंकि शास्त्रों के अनुसार यह हिंसा अनुचित नहीं है।
  • सत्य का पालन करना भी ब्रह्मचर्य का एक नियम है। यदि जीवन में असत्य बोला जाए तो इससे भी ब्रह्मचर्य टूटता है।
  • यदि कोई चोरी करता है तो इससे भी ब्रह्मचर्य भंग होता है क्यूंकि महर्षि पतंजलि ने “पतंजलि योगसूत्र” में ब्रह्मचर्य का नियम चोरी न करना भी बताया गया है।

ब्रह्मचर्य व्रत के पालन की सबसे बड़ी बाधा

ब्रह्मचर्य व्रत का पालन करते समय केवल कोई एक ही बाधा हमारे मार्ग की रुकावट नहीं बनती। ब्रह्मचर्य के मार्ग में हमें बहुत सी बाधाओं का सामना करना पड़ता है।

  • कामुक इच्छाएं – मनुष्यों को सामान्य रूप से कामुक इच्छाएं होती हैं और ये इच्छाएं उन्हें ब्रह्मचर्य के मार्ग से हटा सकती हैं। यह इच्छाएं उन्हें बाहरी विषयों, संबंधों, और वातावरण में आकर्षित कर सकती है।
  • सामाजिक दबाव – सामाजिक दबाव भी ब्रह्मचर्य को प्रभावित करता है। यह दबाव परिवार या समाज के द्वारा उत्पन्न हो सकता है और यह दबाव ही ब्रह्मचर्य को स्थायी रूप से त्यागने की वजह बनता है।
  • संबंधों का आकर्षण और आवश्यकता – किसी व्यक्ती का अपने संबंधों के प्रति आकर्षण और संबंधित व्यक्ति की आवश्यकता उसे ब्रह्मचर्य को छोड़ने के लिए प्रेरित कर सकती है। यह आवश्यकता ही व्यक्ति को संबंधों के निर्माण और उन्हें बरकरार रखने के लिए प्रेरित करती है।
  • मानसिक संतुष्टि – ब्रह्मचर्य की प्राकृतिक आवश्यकता के विपरीत, मनुष्यों की मानसिक संतुष्टि इसे छोड़ने के लिए प्रेरित करती है। मनुष्य को यह संतुष्टि कामुकता से और स्नेह या रोमांटिक प्रेम के माध्यम से प्राप्त हो सकती है।

इन सभी कारणों का प्रभाव अलग-अलग लोगों पर अलग-अलग स्तर का हो सकता है।

ब्रह्मचर्य की रक्षा के लिए किन नियमों का पालन करे

समाज में जो भी लोग अपने जीवन में ब्रह्मचर्य का चुनाव करते हैं उनमें से अधिकतर आध्यात्मिक विचार की खोज में जुटे लोग होते हैं। जैसे सन्यासी आदि। ब्रह्मचर्य व्रत की रक्षा के उपाय इस प्रकार हैं जिनका पालन करके हम अपने ब्रह्मचर्य की रक्षा कर सकते हैं।

सबसे पहले और सबसे महत्वपूर्ण , अपने आप को संयमित रखना आवश्यक है। इसमें ब्रह्मचर्य के महत्व को सदैव याद रखना शामिल है । यह भी महत्वपूर्ण है कि अपनी सीमाएं तय की जाएं और उन स्थितियों या वातावरणों से बचा जाएं जो ब्रह्मचर्य को त्यागने के लिए आकर्षित कर सकते हैं।

ऐसी समान और आध्यात्मिक विचारधारा वाले लोगों के साथ रहना चाहिए जो ब्रह्मचर्य के प्रति समान नजरिया रखते हैं। ऐसा करना ब्रह्मचर्य की भावना को बल प्रदान करता है। नियमित चर्चा करना, अपने अनुभवों को साझा करना और मार्गदर्शन के लिए मेंटर या आध्यात्मिक नेताओं से सलाह लेना, अपने ब्रह्मचर्य व्रत को मजबूत बनाने में मदद करता है।

ध्यान, प्रार्थना और आचार-विचार जैसे आध्यात्मिक अभ्यासों में जुटने से भी इस प्रक्रिया में मदद मिलती है।

ब्रह्मचर्य कितने प्रकार होता है

ब्रह्मचर्य मुख्य रूप से 4 प्रकार का होता है।

  • वार्षिक ब्रह्मचर्य
  • आध्यात्मिक ब्रह्मचर्य।
  • विवाहित ब्रह्मचर्य
  • संन्यासी ब्रह्मचर्य

प्रथम, युवा जब तक विवाह नहीं करते हैं, तब तक वार्षिक ब्रह्मचर्य में रहते हैं।द्वितीय, जिसमे नियमित रूप से ध्यान और आध्यात्मिक अभ्यास में रत रहते हैं, आध्यात्मिक ब्रह्मचर्य।

तृतीय, विवाहित व्यक्ति भी अपने पत्नी या पति के साथ संयमित रहकर विवाहित ब्रह्मचर्य का पालन कर सकते हैं।चतुर्थ, संन्यासी, बाबा, योगी या धार्मिक संघ के सदस्यों द्वारा अपनाया जाने वाला संन्यासी ब्रह्मचर्य होता है।

क्या स्त्रियों को भी ब्रह्मचर्य व्रत का पालन करना चाहिए

यह एक विवादास्पद मुद्दा है जो धार्मिक परंपराओं और संप्रदायों के अनुसार भिन्न हो सकता है।हिंदू धर्म में, ब्रह्मचर्य व्रत को एक बहुत ही पवित्र व्रत माना जाता है। हिन्दू धर्म के अनुसार ब्रह्मचर्य का पालन स्त्री और पुरुष दोनों ही कर सकते हैं। बस इसके लिए स्वयं को संयमित करना होता है। व्रत पालनकर्ता की दृढ़ इच्छाशक्ति इस व्रत में सहायक होती है।

ब्रह्मचर्य के क्या लाभ हैं

ब्रह्मचर्य का पालन करने से अनेक लाभ प्राप्त होते हैं। यह सेक्सुअल संयम का मार्ग होता है, जिससे शरीर और मन को पुनरुत्थान में होता है।ब्रह्मचर्य से शरीर में शक्ति का संग्रह होता है। ब्रह्मचर्य मनुष्य की विचारशक्ति को विकसित करता है। यह आत्म-नियंत्रण और आत्म-विकास में सहायता प्रदान करता है। ब्रह्मचर्य मनुष्य की शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक उन्नति में सहायक होता है।

ब्रह्मचर्य के आध्यात्मिक लाभ क्या हैं

ब्रह्मचर्य आध्यात्मिक जीवन में एक महत्वपुर्ण सहायक स्तम्भ का कार्य करता है। यह आध्यात्मिक साधना में स्थिरता लाता है और मन को शुद्ध करता है। इससे व्यक्ति अपने सामर्थ्यों को पहचानता है। ब्रह्मचर्य से मन और बुद्धि में स्थिरता आती है और व्यक्ति आत्मिक अनुभव को प्राप्त करता है।और यह आध्यात्मिक सच्चाई और आनंद के पथ पर चलने में सहायता करता है।

दैनिक जीवन में ब्रह्मचर्य के लाभ

दैनिक जीवन में ब्रह्मचर्य का पालन करने से हमें अनेक लाभ प्राप्त हो सकते हैं। ब्रह्मचर्य का पालन करने से  रोग प्रतिरोधक शक्ति बढती है और देह निरोगी रहती है। यह हमारे मन, शरीर और आत्मा को संतुलित और शुद्ध रखने में मदद करता है।

ब्रह्मचर्य हमें स्वयं को नियंत्रित करने और अपनी इच्छाओं पर विजय प्राप्त करने की क्षमता प्रदान करता है।ब्रह्मचर्य हमें सच्चा सुख और आंतरिक शांति की प्राप्ति करने में मदद करता है। यह मन की स्थिरता और संयम को विकसित करता है और हमारे जीवन को आनंदमय बनाता है।

स्त्रियों के लिए ब्रह्मचर्य का महत्व

ब्रह्मचर्य स्त्रियों के लिए पवित्रता का मार्ग है। यह महिलाओं को आध्यात्मिक रूप से परिपूर्ण बनाने में मदद करता है। स्त्रियों के लिए ब्रह्मचर्य के लाभ और महत्व बताने वाले कुछ बिंदु नीचे दिए गए हैं जो आपको बताएँगे ब्रह्मचर्य के लाभ स्त्रियों के लिए क्या होते हैं।

  • ब्रह्मचर्य स्त्रियों को आत्म-सम्मान और स्वाधीनता का अनुभव करने की स्वतंत्रता देता है। यह उन्हें अपने शरीर और मन पर नियंत्रण रखने की क्षमता प्रदान करता है।
  • ब्रह्मचर्य स्त्रियों को मानसिक और आध्यात्मिक विकास का मार्ग दिखाता है। यह उन्हें स्थिरता, शांति, आत्मज्ञान की प्राप्ति में मदद करता है, और साथ ही महिलाओं को स्वस्थ और संतुलित जीवन जीने का मार्ग दिखाता है।
  • ब्रह्मचर्य महिलाओं की सामाजिक स्थिति को एक उच्चतम दर्जे तक पहुँचाने में सहायता करता है।
  • ब्रह्मचर्य महिलाओं की मानसिक शक्ति और आत्म नियंत्रण को बढ़ाता है।

FAQ – Frequently Asked Questions

1 - क्या पत्नी के साथ रहते हुए भी ब्रह्मचर्य का पालन कर सकते हैं 

हां, पत्नी के साथ रहते हुए भी ब्रह्मचर्य का पालन संभव है।
अगर कोई व्यक्ति ब्रह्मचर्य का पालन 12 वर्ष तक नियमित करता है, तो क्या होगा?

यदि कोई व्यक्ति नियमित रूप से 12 वर्षों तक ब्रह्मचर्य का पालन करे, तो वह अपनी इन्द्रियों पर नियंत्रण साध लेता है। उस व्यक्ति की स्वयं में  शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक रूप से गहरा परिवर्तन महसूस होता है।
यदि सारी दुनिया ब्रह्मचारी हो गयी तो जीवन कैसे आगे बढ़ेगा

यदि सारी दुनिया ब्रह्मचारी हो गयी तो भी जीवन आगे बढ़ता रहेगा क्यूंकि ब्रह्मचर्य का एक प्रकार विवाहित ब्रह्मचर्य भी होता है। और इससे विश्व में शांति, मानसिक शुद्धि और समानता की प्रगति होगी।
ब्रह्मचर्य का पालन करने वालों का दिमाग इतना तेज क्यों होता है

 ब्रह्मचर्य विचारशक्ति को विकसित करता है साथ ही संयम और मानसिक शांति शान्ति को बढ़ाता है। ब्रह्मचर्य के पालन से प्राप्त होने वाली ब्रह्मचर्य शक्ति मन को ऊर्जावान, चिंतामुक्त और एकाग्र करती है। इसीलिए ब्रह्मचर्य का पालन करने वाले लोगों का दिमाग इतना तेज़ होता है। ब्रह्मचर्य से मिलने वाली शक्ति उन्हें अपनी बुद्धि का पूर्ण इस्तेमाल करने में सक्षम बनाती है। 

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