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शिवलिंग भगवान् शिव का प्रतीक है। शिवलिंग की पूजा की जाती है, शिवलिंग पर जल चढ़ाया जाता है, दूध चढ़ाया जाता है इसके साथ और भी कई वस्तुएं शिवलिंग पर अर्पित करी जाती हैं। लेकिन समाज में इसी शिवलिंग पर कई तरह के प्रश्न भी उठाये जाते हैं। आज इस लेख में हम उन सभी प्रश्नों को हल करने का प्रयत्न करेंगे।
शिवलिंग और उससे जुड़े तथ्य | shivling or usse jude tathy
आज हम आपको शिवलिंग से जुड़े ऐसे फैक्ट बताएंगे जिनको जानने के बाद आपको अपने कई प्रश्नों का उत्तर मिल जायेगा जैसे – शिवलिंग कैसे बना, शिवलिंग कहाँ से आया। इसके साथ ही आप शिवलिंग से जुडी ऐसी बातें जानेंगे जो आप आज से पहले नहीं जानते थे |
इस लेख में हम आपको हिन्दू ग्रंथों के आधार पर शिवलिंग से जुड़ी साइंस बताएँगे | इसके बाद आप जान जायेंगे कि शिवलिंग का आकर ऐसा क्यों है।
शिवलिंग कैसे बना | shivling kaise bana
शिवलिंग से जुड़ा एक बड़ा सवाल है की शिवलिंग कैसे बना | यह एक ऐस प्रश्न है जो शिव भक्तों के मन में हमेशा उठता है और अक्सर उन्हें इस प्रश्न का सामना उस समय भी करना पड़ता है जब दूसरे धर्मों में विश्वास रखने वाले लोग उनकी आस्था पर सवाल उठाते हैं |
तो चलिए आपकी शंकाओं का समाधान करते हैं |
हिन्दू धर्म में ऋषि मुनि जो की वास्तव में उस समय के वैज्ञानिक थे, खोजकर्ता थे | उनके द्वारा लिखे गए वेद ऋग्वेद में शिवलिंग के बारे में बताया गया है | ऋग्वेद में शिवलिंग के बारे में बताते हुए लिखा गया है की शिवलिंग का रूप हिरण्यगर्भ से प्रेरित है और हिरण्यगर्भ को वेदों में इस ब्रह्माण्ड का प्रारंभिक रूप बताया गया है |
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तो दोस्तों हिरण्यगर्भ की तस्वीर देखते ही आप समझ गए होंगे की शिवलिंग और हिरण्यगर्भ में क्या समानता है।
ऋग्वेद और खगोल के प्राचीन ग्रन्थ सूर्य सिद्धांत में भी इसी हिरण्यगर्भ का उल्लेख ब्रह्माण्ड के आरम्भिक स्वरुप के लिए किया गया है।
खगोलीय ग्रन्थ सूर्य सिद्धांत के अनुसार जब सृष्टि की उत्त्पति हुई तो उसका आरम्भिक स्वरुप हिरण्यगर्भ के सामान था। इस प्रकार शिवलिंग का निर्माण हुआ अर्थात शिवलिंग बनाया नहीं गया अपितु शिवलिंग ब्रह्माण्ड के स्वरुप का ही प्रतीक है। आशा करते हैं की इन तथ्यों को जानने के बाद आप यह स्पष्ट रूप से जान गए हो कि शिवलिंग कैसे बना और साथ ही आपके इस प्रश्न का जवाब भी बता देते है कि शिवलिंग कहाँ से आया ? शिवलिंग कहीं से नहीं आया बल्कि वह इस ब्रह्माण्ड के स्वरुप को ही दिखाता है।
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शिवलिंग का आकार ऐसा क्यों है | shivling ka aakar aisa kyu hai
शिवलिंग के आकार को लेकर एक लम्बे समय से हिन्दु वर्ग का मज़ाक उड़ाया जाता रहा है। उनसे पूछा जाता है कि शिवलिंग का आकार ऐसा क्यों है ? किन्तु उनके पास इसका कोई जवाब नहीं होता। आमतौर पर शिवलिंग और हिन्दुओं के विषय में यह कहा जाता रहा है कि हिन्दू शिव के लिंग (private part) की पूजा करते हैं। इस प्रकार की बातें करने के लिए उनके पास केवल एक आधार है और वह है शिवलिंग का आकार।
शिवलिंग के आकार को देखते हुए समाज का एक वर्ग इसकी तुलना पुरुषों के शिशन (male private part) से करता है।
सबसे पहले आप सभी के लिए यह जानना जरूरी है की लिंग शब्द का मतलब Male Private Part नहीं होता है। लिंग शब्द का असली मतलब symbol है, चिन्ह है। जैसे :स्त्रीलिंग महिला होने का प्रतीक है और पुलिंग पुरुष होने का प्रतीक है उसी प्रकार शिवलिंग भगवान शिव का प्रतीक है।
तो आइये अब हम आपको बताते हैं की शिवलिंग का आकार ऐसा क्यों है।
जैसा कि हम आपको पहले बता चुके हैं कि हिन्दू धर्म के प्राचीन ग्रन्थ ऋग्वेद और खगोलीय ग्रन्थ सूर्य सिद्धांत के अनुसार ब्रहम्माण्ड के आरम्भिक स्वरुप को हिरण्य गर्भ के सामान बताया गया है। शिवलिंग का यह आकार हिरण्यगर्भ से ही प्रेरित है इसीलिए शिवलिंग का आकार ऐसा है और शिवलिंग कोई पुरुष जनन तंत्र (Male Private Part) नहीं है। आशा करते हैं शिवलिंग के आकार को लेकर आपके मन में जो शंकाएं थीं उनका समाधान हो गया। और अब आप किसी को भी आसानी से समझा सकते हैं कि आखिर शिवलिंग का आकार ऐसा क्यों है।
इसी प्रकार के प्रश्न शिवलिंग के गोलाकार मूर्तितल पर भी उठते हैं। शिवलिंग का जो गोलाकार मूर्तितल होता है ,उसे जलहरी कहते हैं। हिन्दू धर्म से अनजान समाज का एक वर्ग इसे योनि (Female Private Part) कहता है। यह एक गलत तथ्य है। इस स्थान का असली नाम जलहरी होता है। यह आकार में ऐसा इसीलिए होता है ताकि शिवलिंग पर अर्पित होने वाला जल और दूध एक सही मार्ग से बहार निकल सके।
योनि शब्द के अर्थ को लेकर भी समाज में कई प्रकार भ्रांतियां फैली हुई हैं। योनि संस्कृत भाषा का शब्द है और संस्कृत में इस शब्द का मतलब (Female Private Part) नहीं होता है।
संस्कृत भाषा में लिखी गयी पुस्तकों में बताया गया है की धरती पर जीवों की 8400000 (चौरासी लाख) योनियां हैं मतलब धरती पर 8400000 तरह के जीव, जंतु, कीट, वनस्पति आदि हैं।
संस्कृत भाषा में इस धरती पर मौजूद सभी मनुष्यों को मनुष्य योनि का जीव कहा गया है और इसमें महिला, पुरुष, किन्नर सभी को शामिल किया गया है। इसी तरह बाकि की 8400000 योनियों में अलग-अलग तरह के जीवों, वनस्पतियों को शामिल किया गया है। तो साथियों यह जानने के बाद आपको स्पष्ट हो गया है कि संस्कृत में योनि शब्द का सही अर्थ Female Private Part नहीं है।
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हम उम्मीद करते है की इस आर्टिकल को पढ़ने के बाद शिवलिंग के बारे में आपके मन में चल रहे सारे भ्रम दूर हो गए हैं।
यदि आपके मन में इन तथ्यों की विश्वसनीयता को लेकर अब भी कोई संदेह है तो आप यह भी जान लीजिये की यह तथ्य जिस प्राचीन खगोलीय पुस्तक सूर्य सिद्धांत से लिए गए हैं उसकी रचना वराह मिहिर ने लगभग 1500 साल पहले की थी।
इस पुस्तक में उन्होंने मंगल ग्रह के अर्धव्यास की जो गणना 1500 साल पहले बता दी थी वो गणना वर्तमान समय में भारत के Mars Mission और अमेरिका की अंतरिक्ष एजेंसी NASA की गणना के लगभग समान है।
साल 2004 में नासा के रोवर सैटेलाइट ने मंगल गृह पर पानी और लोहे की मौजूदगी का पता लगाया था ,जबकि मंगल पर पानी और लोहे की मौजूदगी खगोलविद वराह मिहिर अपनी पुस्तक सूर्य सिद्धांत में लगभग 1500 साल पहले ही बता चुके हैं । इन तथ्यों को जानने के बाद खगोलीय पुस्तक सूर्य सिद्धांत की विश्वश्नीयता को लेकर कोई संदेह बाकी नहीं रह गया।
तो साथियों हम आशा करते हैं की आपको, आपके सभी प्रश्नों जैसे की – शिवलिंग कैसे बना, शिवलिंग कहाँ से आया, शिवलिंग का आकार ऐसा क्यों है। इन सभी का उत्तर मिल गया होगा।
हमने पूरी कोशिश की आपकी सभी शंकाओं को दूर करने की। अगर आपको हमारा आर्टिकल अच्छा लगा तो इस जानकारी को अपने दोस्तों, रिश्तेदारों के साथ भी साझा करिये और अगर आपका हमसे कोई प्रश्न है तो जरूर पूछिए हम उसका जवाब देंगे।
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